फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मुस्लिम से हिंदू बना परिवार: माहिद मोहित तो सबीना बनी खुशी, तीनों बच्चों को भी मिले नए नाम

Thu, 01 Oct 2026 07:27 PM IST
Alka Tyagi संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार

सार

एक परिवार ने मुस्लिम धर्म छोड़कर सनातन धर्म अपनाया है। तीर्थ सेवा न्यास की ओर से आयोजित कार्यक्रम में गंगा स्नान, यज्ञ-हवन और नामकरण संस्कार संपन्न कराए गए।
 
विज्ञापन
परिवार ने अपनाया सनातन धर्म - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

चंडीघाट पर बृहस्पतिवार को विशेष धार्मिक कार्यक्रम में पीलीभीत उत्तर प्रदेश निवासी एक परिवार ने मुस्लिम धर्म छोड़कर सनातन धर्म अपनाया। सहारनपुर निवासी एक अन्य व्यक्ति ने भी इस कार्यक्रम में सनातन धर्म में वापसी की। तीर्थ सेवा न्यास की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में गंगा स्नान, यज्ञ-हवन और नामकरण संस्कार संपन्न कराए गए।

विज्ञापन


न्यास के अध्यक्ष संत राम विशाल दास व अन्य संतों की मौजूदगी में यह संस्कार आश्रम में विधि-विधान से हुआ। घर वापसी करने वाले परिवार में माहिद, सबीना बीबी और उनके तीन बच्चे शामिल थे। धार्मिक संस्कारों के बाद माहिद को मोहित और सबीना बीबी को खुशी नाम दिया गया। उनके दो पुत्रों को रोशन एवं रोहन व पुत्री को अनन्या नाम मिला। सहारनपुर निवासी इब्राहिम को यज्ञ-हवन के बाद विराट पुंडीर नाम प्रदान किया गया।

उत्तराखंड: हरिद्वार में ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज की स्थापना को मिली मंजूरी, सीएम ने जताया पीएम मोदी का आभार

विज्ञापन
विज्ञापन

यज्ञ-हवन और नामकरण संस्कार आचार्य कुलदीप विद्यार्थी और मुकेश शास्त्री ने संपन्न कराए। उपस्थित संत-महंतों और श्रद्धालुओं ने परिवार का पुष्पवर्षा और माल्यार्पण कर स्वागत किया। तीर्थ सेवा न्यास ने घर वापसी करने वाले सभी लोगों को प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए। धार्मिक संस्कारों के बाद पीलीभीत के परिवार के सदस्यों को नए नाम मिले। माहिद अब मोहित और सबीना बीबी अब खुशी के नाम से जाने जाएंगे। उनके बच्चों को रोशन, रोहन और अनन्या नाम दिए गए। सहारनपुर के इब्राहिम को विराट पुंडीर नाम मिला।

संत राम विशाल दास महाराज ने कहा कि सनातन केवल एक पूजा-पद्धति नहीं है। यह जीवन को सत्य, संस्कार, कर्तव्य, सेवा और सदाचार से जोड़ने वाली जीवन-दृष्टि है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अपनी आस्था के संबंध में निर्णय लेता है, समाज को उसके साथ सम्मान और सहयोग रखना चाहिए। उन्होंने समाज में धर्म, संस्कार और सेवा की चेतना को मजबूत करने का उद्देश्य बताया। कार्यक्रम का समापन संतों के आशीर्वाद और श्रद्धालुओं के साथ हुआ।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें