नोटबंदी को लगभग डेढ़ महीना बीत चुका है। हर तीसरे दिन नई गाइड लाइन, नए नियम और नई शर्तें। मगर धरातल पर हालात और बेकाबू होते जा रहे हैं। बैंक के बाहर तस्वीर ये है कि लोगों को अपने पैसे निकालने के लिए भी पुलिस के थप्पड़ खाने पड़ रहे हैं। मंगलवार को पीड़ितों ने नोटबंदी के फैसले को जमकर कोसा। साथ ही ये सवाल भी पूछा कि कुछ लोगों के पास करोड़ों रुपये के नए नोट कैसे पहुंच रहे हैं।
विकास भवन में पीएनबी शाखा की लाइन में लगे रोशनाबाद निवासी वेदपाल ने बताया कि सुबह एक कप चाय पीकर सीधे बैंक आकर लाइन में लग गए थे। दो घंटे हो चुके हैं, अभी पता नहीं गेट तक पहुंचने के लिए कितने घंटे और लाइन में लगना पड़ेगा। रावली महदूद निवासी अकबर अली ने बताया कि कई काम छोड़कर आज पैसे निकालने के लिए बैंक पहुंचे, पर यहां तो धक्का मुक्की के चलते आगे बढ़ने के बजाय पीछे हटते जा रहे हैं। सिडकुल की फैक्ट्री में कार्यरत विकास धीमान, साहिल, भूपेंद्र आदि का कहना था कि कालेधन निकलने से अभी तक आम आदमी को कोई फायदा नहीं है, उल्टा अपने पैसे निकालने के लिए लाठी और थप्पड़ जरूर खाने पड़ रहे हैं। लाइन में लगे जनेश्वर प्रसाद, मुकेश सैनी, इंद्र पाल आदि ने नोटबंदी के फैसले को आम आदमी के लिए घातक बताया। उनका कहना था कि लोगों के पास करोड़ों के नोट मिल रहे हैं और यहां दो हजार रुपये के लिए घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है।