शहर के एक पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य पर स्कूल से बर्खास्त एक शिक्षिका की अश्लील टिप्पणी और मानसिक उत्पीड़न करने का मुकदमा दर्ज कराया है। कनखल थाना पुलिस ने मुकदमा दर्जकर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस को दी तहरीर में शिक्षिका ने आरोप लगाया कि वह वर्ष 1996 में संबंधित स्कूल में पढ़ाती रही है। 26 जुलाई 2011 में पहली बार प्रधानाचार्य ने उनके साथ अश्लील टिप्पणी तब की गई, जब अन्ना हजारे के पक्ष में एक रैली निकाली जा रही थी। आरोप है कि इसके बाद प्रधानाचार्य अपनी हरकत से बाज नहीं आए और लगातार उन पर अश्लील टिप्पणियां करते रहे। यही नहीं उनके हिसाब से काम करने पर प्रिंसिपल बनवा देने का भी लालच दिया। शिक्षिका का कहना है कि वर्ष 2013 में सिर पर चोट लगने के कारण चिकित्सक ने एक माह के आराम की सलाह दी, लेकिन प्रधानाचार्य ने उन्हें परीक्षा का बहाना बनाकर जबरन स्कूल बुलाया और मानसिक उत्पीड़न किया।
प्रिंसिपल के खिलाफ आवाज उठाने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। वर्ष 2014 में स्कूल की मिडिल विंग संभालने के लिए बाध्य किया। विरोध करने पर डराया धमकाया गया। आरोप है कि उनके पति जब प्रधानाचार्य से बात करने गए तो मिलने से ही मना कर दिया और लगातार उनसे मानसिक उत्पीड़न किया गया। विरोध करने पर मिडिल विंग के इंचार्ज पद से हटाते हुए तबादला दूसरे शहर कर दिया गया। प्रधानाचार्य ने स्कूल मैनेजमेंट को प्रभावित कर उन्हें बर्खास्त करा दिया गया। कार्यवाहक एसओ भवानी शंकर पंत ने बताया कि प्रभावी धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।