हरिद्वार। जिले में चल रहे पंचायत चुनाव का परिणाम क्षेत्र के विधायकों का चार साल के कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड साबित होगा। कई दिग्गजों ने अपने चहेतों को मैदान में उतारने के लिए हाईकमान तक पैरवी करने में कसर नहीं छोड़ी थी। लेकिन अब इन दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर लग गई है।
भाजपा के हरिद्वार जिलाध्यक्ष सुरेश राठौर की ताजपोशी के एक माह बाद हो रहे यह चुनाव उनकी संगठन क्षमता को भी साबित करेगा। रानीपुर क्षेत्र के भाजपा विधायक आदेश चौहान ने अपने कई नजदीकियों को जिला पंचायत का उम्मीदवार बनाने के लिए प्रदेश हाईकमान तक जोर लगाया। अब ऐसे चहेतों को पार्टी की ओर से हरी झंडी मिलने पर नामांकन भी हो गया, लेकिन उनकी जीत और हार से आदेश चौहान की प्रतिष्ठा जुड़ी हुई है। इसके लिए विधायक अभी से जुड़ते नजर आ रहे हैं।
हरिद्वार ग्रामीण क्षेत्र के विधायक स्वामी यतीश्वरानंद को भी लालढांग, नसीरपुर कलां और अपने क्षेत्र की अन्य सीटों पर पार्टी के समर्थित प्रत्याशियों को जीत दिलाने के लिए एडी-चोटी का जोर लगाना होगा। ज्वालापुर के विधायक चंद्रशेखर भट्टेवाले की छवि क्षेत्र में एक सज्जन राजनेता के रूप में आज भी कायम है। उन पर किसी गुट का ठप्पा तो नहीं लगा है लेकिन पार्टी की जीत उनके राजनीतिक सफलता को भी मापेगी।
इसी तरह पूर्व विधायक और कांग्रेस के मीडिया कमेटी के चेयरमैन अम्बरीश कुमार ने अपने कई चहेतों को जिला पंचायत के चुनावों में उतारा है। दावेदारों की जीत अम्बरीश कुमार की हैसियत हाईकमान की नजरों में तय करेगी। सलेमपुर सीट से कांग्रेस के समर्थित प्रत्याशी बनाए गए पूर्व प्रदेश महासचिव और रानीपुर सीट से विधायक के टिकट के मजबूत दावेदार राव आफाक के राजनीतिक भविष्य के लिए यह चुनाव अहम हो गया है क्योंकि इस सीट पर कई मुस्लिम दावेदार मैदान में हैं। वह चूंकि खुद ही प्रत्याशी हैं अत: जीत-हार का असर सीधे उनके भविष्य पर पड़ना तय है। मुख्यमंत्री हरीश रावत के करीबी राव आफाक खुद को हर वर्ग के समर्थन का दावा कर रहे हैं।