त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के मतदान के परिणाम 28 सितंबर को घोषित हो जाएंगे। मतगणना को लेकर प्रत्याशी ही नहीं, समर्थकों की धड़कनें तेज हैं। प्रत्याशी और समर्थक चुनावी प्रचार और मतदान की थकान भी नहीं उतार पाए थे कि अब परिणाम की टेंशन है। मंगलवार को गांवों में नुक्कड़ की चाय की दुकानों से लेकर घर-घर में प्रत्याशियों के हार जीत को लेकर चर्चाएं रहीं। परिणाम घोषित होने के साथ ही क्षेत्र और जिला पंचायत बोर्ड के गठन को लेकर जोड़तोड़ की राजनीति शुरू हो जाएगी।
18 माह बाद जिले के छह ब्लॉकों में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव हुए हैं। ग्राम पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य की 4305 सीटों पर सोमवार को मतदान हुआ। 8751 प्रत्याशियों का भाग्य का फैसला 28 सितंबर को हो जाएगा। 3722 ग्राम पंचायत सीटों पर 4684 प्रत्याशियों, 318 ग्राम प्रधान की सीटों पर 2070 उम्मीदवारों का भाग्य मतपेटियों में बंद है। 221 क्षेत्र पंचायत सीटों पर 1535 प्रत्याशियों और जिला पंचायत की 44 सीटों पर 462 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला मतपेटियां खुलने के साथ होगा।
चुनाव प्रचार और मतदान के बाद मतगणना के लिए प्रत्याशियों को काफी कम समय मिला। अब प्रत्याशियों और समर्थकों की परिणाम को लेकर नींद उड़ी है। मंगलवार को अधिकतर प्रत्याशी काफी दबाव में नजर आए। वे समर्थकों के साथ न्याय पंचायतवार मतदान के आंकड़ों को लेकर अपने हार-जीत का गुणा भाग लगाते रहे। गांव की चाय की दुकानों से लेकर चौपालों पर भी हार जीत को लेकर ही चर्चा रही।
मतदान के बाद अब प्रत्याशियों के हार जीत को लेकर सट्टा लग रहा है। सट्टे में कहीं रुपये दाव पर लग रहे हैं तो कहीं दावत देने का वादा किया जा रहा है। ग्रामीणों ने इस बार रिकॉर्ड मतदान किया है। प्रत्याशी भी मतदाताओं का मूड भांप नहीं सके। इसके चलते उनकी टेंशन बढ़ी है। हार जीत को लेकर हर गांव में सट्टा भी लग रहा है।