किसी भी तरह की आपदा के बाद राहत एवं बचाव के लिए आपदा प्रबंधन विभाग और जिला प्रशासन कितना तैयार है इसकी पोल भूकंप के मॉक अभ्यास में खुलकर सामने आई। मॉक अभ्यास के तहत बुधवार को हरिद्वार जनपद सुबह करीब 9:33 मिनट पर भूकंप से थर्रा उठा। शुरूआती तौर पर 14 लोगों की मौत और हजारों लोग घायल होने की सूचना मिलती है। जिला अस्पताल में घायलों के उपचार के लिए बेडों की व्यवस्था तो की गई थी, लेकिन मॉक अभ्यास में भी करीब तीन घंटे तक यहां कोई घायल नहीं पहुंचाया जा सका।
पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार बुधवार को अचानक भूकंप की सूचना फ्लैश होती है। प्रशासनिक अमला हरकत में आ गया। जिलाधिकारी एसए मुरुगेशन ने सभी अधिकारियों को तत्काल रोशनाबाद पहुंचने को कहते हैं। डीएम ने कंट्रोल रूम में पहुंचकर आपदा राहत की कमान संभाली। सभी महत्वपूर्ण अधिकारी भी कंट्रोल रूम पहुंचे। सूचना मिलती है कि भूकंप से चंडी देवी मंदिर क्षेत्र, सिडकुल में इंद्रलोक कालोनी, जवाहर नवोदय विद्यालय में जानमाल का नुकसान हुआ। इन स्थानों पर राहत एवं बचाव के कार्यों का अभ्यास किस तरह से किया गया, इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई। इतना ही नहीं मीडिया को भी अभ्यास खत्म होने के बाद नुकसान वाले स्थानों के बारे में बताया गया। कुछ स्थानों पर ही इस तरह का प्रदर्शन हो सका। घायलों में भी कुछ पुलिस कर्मियों को शामिल किया गया।
देहात में भी हुआ अभ्यास
भूकंप का अभ्यास शहरी क्षेत्र के अलावा देहात में भी हुआ। वायरलैस पर सूचना मिली कि जिला मुख्यालय से आगे औरंगाबाद गांव के आस पास भी भूकंप से काफी नुकसान हुआ है। कई मकानों के टूटने व लोगों के मलबे में दबे होने की संभावना है। औरंगाबाद में एसडीएम हरिद्वार के नेतृृत्व में स्थानीय पुलिस बल, दो एंबुलेंस, एक बस भेजकर राहत कार्य किया गया। वहीं इंद्रलोक आवासीय बिल्डिंग के घायल व्यक्तियों को एसएडी अस्पताल रोशनाबाद लाया गया। जल निगम/जल संस्थान की टीम ने पेयजल की आपूर्ति दुरुस्त करने की सूचना आपदा कंट्रोल रूम को दी।
पैदल मार्ग से पहुंचे चंडी देवी
चंडी देवी और मनसा देवी की पहाड़ियां आपदा के लिहाज से संवेदनशील मानी जाती हैं। प्रशासन ने मॉक अभ्यास में इन्हें शामिल भी किया। लेकिन यहां राहत व बचाव टीमों को पैदल मार्ग से मंदिर भेजा गया। जिससे टीमों को ऊपर पहुंचने में काफी समय लगा। जबकि मनसा देवी और चंडी देवी पहुंचने के लिए रोपवे की भी व्यवस्था है।