मेला अस्पताल में पीपीपी मोड पर चल रही डायलिसिस यूनिट में डायलिसिस कराते समय पॉवर सप्लाई बंद होने से एक मरीज की मौत और नौ की हालत बिगड़ने की घटना को जिलाधिकारी दीपेंद्र चौधरी ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने पूरे मामले की जांच के निर्देश एडीएम ललित नारायण मिश्रा को दिए।
शनिवार दोपहर को डायलिसिस यूनिट में दस मरीजों की डायलिसिस की जा रही थी। बिजली की अनियमित आपूर्ति के कारण जेनरेटर चलाया जा रहा था। करीब आधे घंटे चलने के बाद जेनरेटर बंद हो गया था। पॉवर सप्लाई बंद होने के बाद मशीनों में लगी बैटरी का बैकअप भी जवाब दे गया। इससे मरीजों की हालत बिगड़ गई थी। मरीज विजय शर्मा की हालत गंभीर होने पर उन्हें जौलीग्रांट रेफर किया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था। मौके पर पहुंचे कांग्रेसियों ने मेला अस्पताल की अव्यवस्थाओं पर नाराजगी जताई थी। जिलाधिकारी दीपेंद्र चौधरी ने बताया कि यह गंभीर मामला है। किसी को भी किसी मरीज के जीवन से खिलवाड़ करने की छूट नहीं दी जा सकती। उन्होंने बताया कि इस मामले की जांच के आदेश एडीएम ललित नारायण मिश्रा को दिए गए हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि जो भी इस घटना के लिए जिम्मेदार होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जेनरेटर का तेल हो गया था खत्म
अब यह बात सामने आई है कि जेनरेटर में तकनीकी खराबी नहीं आई थी, बल्कि उसका तेल खत्म हो गया था। जेनरेटर के पाइप में लीकेज भी था। जेनरेटर के रखरखाव के लिए किसी कर्मचारी की तैनाती नहीं की गई है। तेल का खर्चा यूनिट और मेला अस्पताल प्रशासन दोनों मिलकर उठाते हैं।
ताला लटका देख लौटे व्यापारी
मेला अस्पताल की अव्यवस्थाओं के खिलाफ व्यापारियों ने विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया था। रविवार को व्यापारी नेता सुनील सेठी के नेतृत्व में कई व्यापारी अस्पताल पहुंचे थे। अस्पताल बंद होने से व्यापारियों को बिना प्रदर्शन के ही लौटना पड़ा। सुनील सेठी का कहना है कि सरकार अस्पताल में समुचित सुविधाएं नहीं मिलने के विरोध में व्यापारी आंदोलन करेंगे।