टिकौला कलां गांव में किसान की हत्या के पीछे चल रहा विवाद आज का नहीं है, बल्कि सात साल पुराना है। घायल के अस्पताल में पहुंचने पर पुलिस को आशंका थी की यदि दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए तो स्थिति बिगड़ सकती है। जिसे देखते हुए अस्पताल में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई थी।
ग्रामीणों की माने तो मृतक संजय के भाई संदीप ने करीब सात साल पहले पड़ोसी बलजौर के घर के पास कुछ जमीन खरीदी थी। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों में विवाद चल रहा था। करीब सात से चल रहा है यह विवाद अंदर ही अंदर सुलग रहा था। इससे पहले भी कई बार दोनों पक्षाें में खूनी संघर्ष हो चुका है।
होली से चार दिन पहले भी दोनों में लाठी डंडे चलने से कई लोग घायल हो गए थे। यह रंजिश लगातार बढ़ती रही।
सोमवार को मौका पाकर जिस तरह से संजय को शिकार बनाया गया वह भी इसी रंजिश का नतीजा थी। घटना के बाद पुलिस संजय के शव और घायल गुल्लू को लेकर अस्पताल पहुंची तो पुलिस अधिकारियों ने वहां पर भारी पुलिस बल की तैनात कर दी।
पुलिस को आशंका थी की दोनों पक्षों के ग्रामीण अस्पताल में आए तो टकराव हो सकता है। इसके चलते घायल गुल्लू को प्राथमिक इलाज के बाद तुरंत ही हायर सेंटर रेफर कर दिया। वहीं अस्पताल में गंगनहर इंस्पेक्टर और भगवानपुर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर योगेंद्र सिंह भदौरिया के साथ भारी पुलिस बल तैनात था।
सबसे छोटा भाई था संजय
नारसन। संजय अपने तीनों भाइयों में सबसे छोटा था। संजय की मौत के बाद गांव में मातम का माहौल है। संजय की नौ साल पहले शादी हुई थी। उसके एक लड़का और एक लड़की है। घर के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल हो रहा है।