फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जिंदा बच्चों को दिखाया मृत सात लाख हड़पे

Tue, 24 Nov 2015 12:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
विज्ञापन
विज्ञापन
हरिद्वार। वर्ष 2013 में केदारनाथ आपदा में अपने बेटा-बेटी को मरा दर्शाकर मध्यप्रदेश के एक दंपति ने उत्तराखंड और मध्यप्रदेश सरकार से मुआवजे के नाम पर सात लाख रुपये हड़प लिए। हरिद्वार पुलिस ने मामले से पर्दा उठाते हुए सोमवार को मुकदमा दर्ज कर आरोपी दंपति को गिरफ्तार कर लिया। दंपति के पांच नाबालिग बच्चे भी फिलहाल पुलिस की अभिरक्षा में है।
विज्ञापन

नगर पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि रविवार देर रात विवाद की सूचना पर पहुंचे पुलिसकर्मी विष्णुघाट के पास गंगा किनारे रह रहे एक दंपति और उनके पांच बच्चों को नगर कोतवाली ले आए। पूछताछ में मुआवजे के नाम पर हुए खेल का पर्दाफाश हुआ। पूछताछ में यह बात सामने आई कि मध्यप्रदेश के गांव रामनगर, भभुवा तहसील छतरपुर थाना राजनगर जिला छतरपुर निवासी रामक्रपाल एवं उसकी पत्नी विद्या ने जून वर्ष 2013 में केदारनाथ में 15/16 जून को आई आपदा में अपनी नाबालिग बेटी ममता एवं बेटे अजय को लापता बताते हुए हरिद्वार के मेला नियंत्रण कक्ष मे सूचना दी थी। सितंबर माह में उसी के आधार पर रुद्रप्रयाग जिले के ऊखीमठ थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई। बेटा-बेटी के मृत्यु प्रमाणपत्र भी ले लिए। नवंबर माह में प्रदेश सरकार ने मुआवजे के नाम पर लाखों रुपये का चेक दंपति के पते पर भेजा। यही नहीं दंपति ने मध्यप्रदेश सरकार से भी मुआवजे के नाम पर कई लाख रुपये ले लिए। दोनों राज्य की सरकारों से सात लाख का मुआवजा लेने की बात सामने आई है। दंपति ने ही यह योजना मिलकर बनाई थी। आपदा के दौरान दंपति हरिद्वार में ही था और पांचों बच्चे उन्हीं के ही साथ थे। बीच-बीच में भी ये परिवार यहां आता जाता रहा। अब पंद्रह दिन पहले ही दंपति अपने बच्चों के साथ यहां आकर रहने लगा था। कांस्टेबल जयप्रकाश की ओर से प्रभावी धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दंपति को गिरफ्तार कर लिया। उनके बच्चों को भी कल कोर्ट में पेश करेंगे। एसपी सिटी के अनुसार सहारा कंपनी को इस बाबत रिकवरी के लिए पत्र लिखा जाएगा।
--------
यूं हुआ मामले का खुलासा
हरिद्वार। रविवार की रात दंपति के बीच खूब विवाद हुआ। इसी दौरान किसी ने सिटी पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दे दी। जब पुलिस उन्हें कोतवाली ले आई। तब सामने आया कि पत्नी इस बात पर झगड़ रही थी कि पति ने अपने परिजन को कई लाख रुपये दे रखे हैं। गंगा घाट पर रह रहे दंपति पर कई लाख कहां से आए, इस सवाल पर पुलिस चौंकी। फिर पूरे मामले का परत दर परत खुलासा होता चला गया।
विज्ञापन

--------
मजदूर दिमाग ने हर किसी किया चित्त
-
अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार। पांचवीं की जमात तक पढ़े लिखे रामक्रपाल के दिमाग की करामत जानकार हरिद्वार पुलिस पुलिस भी हक्की बक्की रह गई। उसने दो-दो राज्य सरकारों से मुआवजा लेने के बाद कागजात में मरे अपने बेटा-बेटी का नाम बदलकर उन्हें फिर से जिंदा भी कर डाला।
गरीब तबके से ताल्लुक रखने वाले रामक्रपाल ने यह साबित कर दिखाया कि किस तरह सिस्टम को बेवकूफ बना सकते है। पेशे से दिहाड़ी मजदूर रामक्रपाल वर्ष 2013 में यहां ही रह रहा था।  उसने मेला नियंत्रण कक्ष में पहुंचकर यह बताया कि वह केदारनाथ में रहकर ही मजदूरी करता था और आपदा में उसका एक बेटा-बेटी बह गए। फिर वह यहां से अपने बच्चों को लेकर वापस मध्य मप्रदेश चला गया। स्थानीय स्तर से यह सूचना फिर डीजीपी के कार्यालय में बने कंट्रोल रूम को पहुंची। सितंबर में गुमशुदगी दर्ज हुई। पुलिस किस तरह से विवेचना करती है, ये भी इस केस के खुलासे से उजागर हुआ है। जिंदा बच्चों को मरा बता डाला। राज्य सरकार ने मुआवजे का चेक दे दिया। इसके बाद भी उसका दिमाग चलना बंद नहीं हुआ। मध्यप्रदेश पहुंचकर ही स्थानीय प्रशासन को अपना दुखड़ा सुनाया। उत्तराखंड में बेटा-बेटी के लापता होने के बाद लिखी गई एफआईआर की कॉपी की बदौलत मुआवजा लेने का खेल खेला। यह सब कर चुके रामक्रपाल ने फिर मध्यप्रदेश से ही स्थायी निवास प्रमाण पत्र बनवाकर अपने मरे बच्चों को नाम बदलकर जिंदा कर डाला। अब आधार कार्ड भी बना लिया था। यही नहीं राशन कार्ड में भी ममता को पूजा और अजय को अमर घोषित कर दिया।
--------
पता है उसे कागजात का वजूद
हरिद्वार। बेहद शातिर रामक्रपाल भले ही कम पढ़ा लिखा है लेकिन वह यह बखूबी जानता है कि सरकारी कागज कितने काम के होते है। उसके कब्जे से आधार कार्ड, राशन कार्ड, स्थायी निवास, मृत्यु, जाति, आय प्रमाणपत्र मिले है। इसके अलावा हर वह कागज मिला है, जो मुआवजे लेने में कारगार रहा है। हालांकि उसका कोई बच्चा कभी स्कूल ही नहीं गया।
-----------
मप्र पुलिस ने भी ले लिए एक लाख
हरिद्वार। जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश की छतरपुर पुलिस यह बात चुकी थी कि रामक्रपाल ने मुआवजे का खेल किया है। तब वहां के राजनगर थाने की पुलिस ने जेल जाने का खौफ दिखाकर उससे एक लाख रुपये ले लिए। इसके बाद रामक्रपाल ने सहारा कंपनी में करीब दो लाख का निवेश कर दिया और एक खाते में साठ हजार रुपये दर्ज कराए। कुछ रकम उसके सालों ने ली और एक लाख रुपये एक जमीन के मामले में डूब गए।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें