हरिद्वार। वर्ष 2003 से 2011 के बीच वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना के तहत अपात्र लोगों को ऋण देने के मामले में कोर्ट के आदेश पर सिडकुल पुलिस ने तत्कालीन जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी, प्रबंधक जिला अग्रणी बैंक, महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र, नाबार्ड प्रतिनिधि, परिवहन प्रतिनिधि और झूठा शपथपत्र देकर ऋण लेने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। एसपी सिटी कमलेश उपाध्याय ने इसकी पुष्टि की है।
कनखल निवासी अधिवक्ता अरुण भदौरिया ने वर्ष 2011 में प्रथम अपर सिविल जल (एसडी) में प्रार्थनापत्र देकर बताया कि वर्ष 2003 से लेकर 2011 तक 252 लोगों को वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना के तहत ऋण दिया गया। ऋण देने में शासनादेशों और मानकों का उल्लंघन किया गया। उनका कहना था कि योजना केवल बेरोजगारों के लिए थी, लेकिन अधिकारियों ने कई धनाढ्य और आयकर दाताओं को ऋण दे दिया। इन लोगों ने बाकायदा शपथपत्र देकर खुद को बेरोजगार बताया था जबकि यह लोग पहले से व्यापार कर रहे थे। आरोप लगाया कि कई लाख के ऋण पर मिलने वाली सब्सिडी के चलते ही सरकारी धन का सीधे सीधे गबन किया गया है।
प्रथम अपर सिविल जल (एसडी) ने इसी साल 19 जनवरी को आरोपी अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश सिडकुल पुलिस को दिए थे। इसके बाद शासकीय अधिवक्ता ने इस आदेश को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी। कोर्ट ने उसे रद्द कर दिया था। एसपी सिटी कमलेश उपाध्याय ने बताया कि तत्कालीन सभी उपरोक्त अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि उच्च अधिकारियों के निर्देशन में विवेचना कराई जाएगी।
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ऋण लेने वालों में कांग्रेस और भाजपा के लोग भी हैं शामिल
हरिद्वार। सब्सिडी डकारने की सूची में कई राजनीतिक, रसूखदार और उनके परिचित शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार इसमें एक विधायक की पत्नी, संवैधानिक संस्था के पद पर काबिज भाजपा से जुड़ी महिला, कई पदाधिकारी शामिल हैं। इस में कांग्रेस के कुछ लोगों के नाम भी शामिल हैं। यह लोग भी पुलिस कार्रवाई की जद में हैं। राजनीतिक और बड़े व्यवसायियों के नाम शामिल होने के कारण पुलिस फूंक फूंक कर कदम रख रही है।
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पुलिस खींच रही थी हाथ
हरिद्वार। हरिद्वार पुलिस ने गले की फांस बन रहे इस मुकदमे को काफी टालने की कोशिश की लेकिन कोर्ट की सख्ती के चलते केस दर्ज करना ही पड़ा। दरअसल, निचली अदालत ने करीब एक माह पूर्व ही मुकदमा दर्ज करने के आदेश दे दिए थे लेकिन कई दिन तक थाने में आदेश धूल फांकता रहा। इधर, आदेश के खिलाफ सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता ने जिला जज विवेक भारती शर्मा की कोर्ट में रिवीजन दाखिल किया था। रिवीजन खारिज होने के बाद फिर से निचली अदालत में मामला आ गया और आखिरकार पुलिस को मुकदमा दर्ज करना ही पड़ा।