अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
स्टेटस सिंबल की चाह बड़ी ही दुखदायी साबित हो रही है। डीपीएस के छात्र सात्विक शर्मा की खुदकुशी इसका जीता जागता उदाहरण है। शहर में पहले भी ऐसी घटनाएं होने के बाद भी लाइसेंसी हथियारों के शौकीनों की संख्या में रत्ती भर भी कमी नहीं आई है।
छात्र की खुदकुशी करने की घटना ने हर किसी का ध्यान लाइसेंसी हथियार की तरफ खींचा है। अब हर कोई हथियार के रख रखाव को लेकर अपना- अपना तर्क दे रहा है। बकौल परिवार की लाइसेंसी हथियार लॉकर में रखा था, पता नहीं कैसे छात्र ने उसे निकाल लिया। ये उन्हें पता ही नहीं है। हरिद्वार में इस तरह दिल झकझोर देने वाली यह पहली घटना नहीं है, इससे पहले भी दो प्रतिष्ठित परिवारों के लाडले इसी तरह दुनिया को अलविदा कह चुके हैं। अब छात्र सात्विक शर्मा की मौत ने हर किसी को हिलाकर रख दिया है। हथियारों के रख- रखाव को लेकर एक नई बहस सी छिड़ गई है। कोई हथियारों को व्यर्थ ही बता रहा है तो किसी का कहना है कि हथियार और बुलेट अलग- अलग स्थान पर होना चाहिए, उसके रख रखाव की जिम्मेदारी भी असलहाधारक की होनी चाहिए। जब सुरक्षा का खोखला दावा लेकर हासिल किया गया हथियार भले ही किसी अपने की जान ले रहा हो लेकिन फिर भी लाइसेंसी हथियार लेने की होड़ मची है।