अमर उजाला ब्यूरो
रोशनाबाद।
दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार पुत्र को किशोर घोषित कराने के लिए फर्जी टीसी देने के मामले में आरोपी पिता को दोषी पाते हुए विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अर्चना सागर ने चार वर्ष के कारावास और दस हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।
शासकीय अधिवक्ता कुशल पाल सिंह चौहान व आदेश चौहान ने बताया कि अमित पुत्र स्वराज पर 15 वर्षीय बालिका के साथ दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए पीड़िता के पिता ने 14 अक्तूबर 2014 को कोतवाली रुड़की में मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने मामले में अमित को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उसके पिता स्वराज ने अमित को किशोर बताते हुए पुलिस को स्कूल का स्थानांतरण प्रमाण ( टीसी) पत्र पुलिस को दिया। जिसके आधार पर उसे किशोर घोषित किया जा सके। परंतु विवेचक ने जांच के दौरान पाया कि स्वराज ने अमित का जो टीसी प्रमाण पत्र कि फोटो प्रति अपने हस्ताक्षर करके पुलिस को दी थी, वह फर्जी थी स्वराज ने जिस स्कूल की टीसी पुलिस को दी थी अमित कभी उस स्कूल में पढ़ा ही नहीं। जांच अधिकारी ने टीसी फर्जी पाते हुए अमित के पिता स्वराज पुत्र अतर सिंह निवासी ढडेडी ख्वाजगीपुर कोतवाली रुड़की के खिलाफ भी फर्जी दस्तावेज तैयार करने का मामला दर्ज कर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किए थे। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 10 गवाह पेश किए गए थे। न्यायालय ने सुनवाई करते हुए अमित पुत्र स्वराज को दोषमुक्त कर दिया। वहीं अमित के पिता स्वराज पुत्र अतर सिंह को फर्जी टीसी तैयार करने के मामले में दोषी पाते हुए चार वर्ष के कारावास व दस हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।