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गंगाघाटों की सफाई पर लगेंगी 15.45 करोड़ की झाडू

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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
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नगर निगम गंगा घाटों की सफाई कार्य को निजी क्षेत्र को देने जा रहा है। गंगा घाटों की सफाई पर तीन साल में 15.45 करोड़ रुपये खर्च होंगे। नगर निगम ई टेंडरिंग के माध्यम से ठेका देगा।
नगर निगम 24 अक्तूबर को ई-टेंडरिंग केे माध्यम से ठेका देने जा रहा है। हालांकि चुनाव आचार संहिता को देखते हुए संशय की स्थिति भी बनी हुई है। इसके बाद भी नगर निगम ने ठेका देने की तैयारी पूरी कर ली है। अधिक बजट प्राप्त करने के लिए अधिकारियों ने गंगा पर बने आश्रमों के निजी घाटों को सम्मिलित कर संख्या बढ़ाकर 72 की है। जबकि अर्द्धकुंभ 1992 में आश्रमों और अखाड़ों को गंगा नदी पर स्नानघाट बनाने की सशर्त अनुमति दी थी। जिसमें घाट की सफाई, रखरखाव की नियमित व्यवस्था करना भी शामिल था। अब नगर निगम ने निजी घाटों की जिम्मेदारी भी खुद ले ली है। गंगा घाटों की समुचित सफाई व्यवस्था नहीं होने को लेकर उच्च न्यायालय और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में फजीहत हो रही थी। जवाबदेही को लेकर घिरी सरकार व नगर निगम के प्रस्ताव पर नमामि गंगे योजना से तीन साल की सफाई के लिए 15.45 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली है। ठेका देने और टेंडर बनाने की पूरी प्रक्रिया से अधिकारियों ने अपने निर्माण विभाग के इंजीनियरों को दूर रखा है और नमामि गंगे की गाइड लाइन नहीं किए जाने के आरोप टेंडर होने से पहले ही लगाए जाने लगें। नगर निगम के प्रभारी अधिशासी अभियंता अनंत कुमार सैनी जब टेंडर तैयार करने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कुछ कहने से इनकार कर दिया। केवल इतना कहा कि सुना है घाटों की सफाई के लिए टेंडर होने जा रहा है।
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जो घाट बनाएगा वही रखरखाव करेगा की थी शर्त
अर्द्धकुंभ 1992 में मेला प्रशासन ने अखाड़ों व आश्रमों को इस शर्त के साथ गंगा तट पर स्नान घाट बनाने की अनुमति दी थी कि उनकी नियमित सफाई, रखरखाव, लाइट आदि व्यवस्थाएं भी उनको ही करनी होगी। इस शर्त के साथ भी पाबंद कर किया गया था कि घाटों पर किसी प्रकार का अतिक्रमण नहीं किया जाएगा, लेकिन एक भी शर्त का अनुपालन नहीं किया जा रहा है। कई घाटों पर संतों ने आरामगाह बनाकर एसी तक लगा रखे हैं। गंगा तट सरकारी कम और निजी संस्थाओं के घाट अधिक है। अब नगर निगम इन निजी घाटों को भी नमामि गंगे की सूची सम्मिलित कर उनकी सफाई व्यवस्था भी अपने जिम्में ले ली है।
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ई-टेंडरिंग में कोई भी भाग ले सकता है
गंगा घाटों की सफाई का ठेका पूरी पारदर्शिता से करने के लिए ई-टेंडरिंग से किया जा रहा है। 24 अक्तूबर तक कोई भी व्यक्ति ठेकेदार व संस्था अपना टेंडर अपलोड कर सकता है। पात्रता के लिए तकनीकी, अनुभव और टर्नओवर की आदि की शर्त रखी गई हैं जो पात्रता पूरी करेगा उसे ही ठेका दिया जाएगा।
- डॉ. ललित नारायण मिश्रा नगर आयुक्त
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