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ईद-उल-अजहा 2021: कोरोना की पड़ी मार तो डिजिटल हुआ बकरों का कारोबार

Tue, 20 Jul 2021 04:42 PM IST
देहरादून ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार

सार

कारोबारियों ने ऑनलाइन बकरों को बेचना शुरू कर दिया है। इसके लिए व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम जैसे ऑनलाइन सोशल मीडिया प्लेटफार्मों का सहारा लिया जा रहा है।
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बकरा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कुर्बानी का त्योहार ईद उल अजहा 21 जुलाई को मनाया जाएगा। बकरीद पर भी कोरोना का साया पड़ रहा है। सख्ती के चलते इस बार बकरों की हाट अब तक नहीं लग सकी। इस कारण कारोबारियों ने ऑनलाइन बकरों को बेचना शुरू कर दिया है। इसके लिए व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम जैसे ऑनलाइन सोशल मीडिया प्लेटफार्मों का सहारा लिया जा रहा है। इस पर बाकायदा बकरों की फोटो, वीडियो व कीमत शेयर की जा रही है। खरीदारी भी हो रही है, लेकिन पिछले साल की तरह रफ्तार न मिलने के कारण कारोबारी खासे मायूस हैं।

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ईद-उल-अजहा का त्योहार लगातार दूसरे साल भी कोरोना के साए में मनाया जाएगा। बकरीद नजदीक आते ही साप्ताहिक बकरा मंडी में खरीदारों की ऊंची बोली से परेशान ग्राहक ऑनलाइन मार्केट की ओर रुख कर रहे हैं। इंटरनेट पर पांच हजार से लेकर तीन लाख तक के मनचाहे बकरे आसानी से मिल रहे हैं। ईद-उल-अजहा (बकरीद) पर अपनी हैसियत के हिसाब से मुसलमान कुछ खास जानवरों की कुर्बानी करते हैं।

पहले ये पशु खुले बाजार (ऑफ लाइन मार्केट) में ही बेचे जाते थे, लेकिन वक्त बदलने के साथ ही बकरों की खरीद बिक्री का तरीका भी बदल गया है। ज्वालापुर के मोहल्ला कैथवाड़ा निवासी आबिद खान ने बताया कि अब लोग ओएलएक्स या फिर अन्य वेबसाइट के जरिए कुर्बानी के जानवरों की खरीदारी कर रहे हैं। बकरों की खरीद बिक्री के लिए इन दिनों गोट इंडिया डॉट कॉम नाम की वेबसाइट काफी लोकप्रिय हो रही है।
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तुर्की दुम्बा से राजस्थानी नस्ल तक के बकरे
ऑनलाइन बाजार में तुर्की दुम्बा से लेकर पंजाबी जैसी हर नस्ल के बकरे मौजूद हैं। इनकी कीमत पांच हजार से शुरू है, जो लाखों तक जाती है। ऑनलाइन मार्केट में राजस्थानी नस्ल की बिक्री ज्यादा है। ऑनलाइन बकरों की मांग दिनोंदिन बढ़ रही है।

पहाड़ी बकरों की ज्यादा होती है मांग
कुर्बानी स्वस्थ बकरे की दी जाती है। इसमें भी पहाड़ी बकरे की अधिक मांग होती है। पहाड़ और मैदान के बकरों की नस्ल ही अलग नहीं होती है, बल्कि उनका चारा भी अलग होता है। पहाड़ के बकरे जंगलों में घास चरते हैं। उनका वजन और आकार धीमी गति से बढ़ता है, जिससे उनका मांस मैदानी बकरों की तुलना में अधिक पसंद किया जाता है। मैदानी इलाकों में हाईब्रिड नस्ल के बकरे पाले जाते हैं। हाईब्रिड नस्ल के बकरे दाना, चोकर, भूसा खाते हैं और इसकी ऊंचाई तेजी से बढ़ती है। इससे उनका मांस का स्वाद पहाड़ के बकरों की तुलना में फीका रहता है।

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