हरिद्वार। मातृसदन की ओर से मुख्यमंत्री के नाम खुला पत्र जारी किया गया। मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद ने खनन के पक्ष में उतरे राजनेताओं के संबंध में सरकार से 18 सवाल पूछे।
परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद ने मातृसदन में बृहस्पतिवार को पत्रकार वार्ता में मीडिया के माध्यम से मुख्यमंत्री हरीश रावत के नाम एक खुला पत्र जारी किया। उन्होंने कहा कि गंगा में खनन किए जाने के पक्ष में राजनेता खुलकर सामने आ रहे हैं। परमाध्यक्ष ने सरकार से सवाल पूछते हुए कहा कि 1952 कुंभक्षेत्र की रक्षा के लिए जारी अधिसूचना के अनुसार रायवाला से अजीतपुर बांध तक किसी भी तरह के खनन पर प्रतिबंध लगाया गया था। लेकिन अधिसूचना को धता बताते हुए पोंटी चड्ढा ने कुंभ क्षेत्र को बर्बाद किया तब ये राजनेता कहां थे। कहा कि 1988 में क्रशर मालिकों ने अपने क्रशर को बचाने के लिए अधिसूचना में जालसाजी की तो उस समय राजनेता कहां थे। स्वामी निगमानंद के बलिदान पर घडियाली आंसू बहाने वाले आज अपने बयानों से मुकर कर खनन की तरफदारी कर रहे हैं। ऐसा करने का उनका आधार क्या माना जाए। कहा कि जब वैज्ञानिक इस बात को मानते हैं कि पत्थर ऊपर से नहीं आता तो फिर नेता खनन किस आधार पर कराने क बात करते हैं। गंगा सफाई के नाम पर 100 करोड़ से ज्यादा का खनन का कारोबार किया गया, जिसका कोई लेखा जोखा नहीं। इन बातों पर राजनेताओं की बोलती बंद क्यों रही। आगे होने वाले कुंभ मेला प्रतिवेदन के सरकारी आंकड़ों के अनुसार कुंभ मेला 2021 केवल पार्किंग के लिए 1500 हेक्टेयर भूमि चाहिए। लेकिन इसके लिए राजनेताओं की जुबान बंद है। खनन के संबंध में सितंबर 2012 का शासनादेश गायब कराना, मातृसदन को बर्बाद कराने की साजिश, हाईकोर्ट की ओर से स्टोन क्रशर गंगा से पांच किलोमीटर हटाने के लिए कभी राजनेता बयान नहीं देते। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री, सरकार और राजनेताओं से सभी सवालों के जवाब चाहे।