जिला अस्पताल आए दिन अपने कामकाज को लेकर चर्चाओं में रहता है। मरीजों को सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा पाने के मामले ही नहीं अन्य काम भी लापरवाही से किए जा रहे हैं। अब अस्पताल की सफाई को लेकर ही देखिए। अस्पताल की शौचालयों की सफाई आग बुझाने के लिए डाली की पाइप लाइन से किया जा रहा है। हर रोज इसका प्रयोग होने से पाइप कई जगह से लीक होने लगा। ऐसे में यदि कभी कोई आग की घटना हुई तो पाइप सही काम नहीं कर पाएगा।
सरकार और स्वास्थ्य विभाग सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं को लेकर जो दावे करें, लेकिन जमीन हकीकत यह है कि हर कदम पर लापरवाही बरती जा रही है। जिला अस्पताल का यही हाल है। यहां की स्वास्थ्य सुविधाएं की नहीं दूसरे कामकाज भी बेपटरी हैं। अस्पताल प्रबंधन की यह लापरवाही समय-समय पर उजागर होती रहती है। इसका खामियाजा मरीज और उनके तीमारदारों के भुगतना पड़ता है।
अमर उजाला ने अस्पताल की साफ-सफाई की पड़ताल की तो पता चला कि सफाई कर्मचारी ग्राउंड फ्लोर में बने शौचालयों की सफाई आग बुझाने के लिए लगाए गए पाइप से कर रहे। अस्पताल में अग्नि सुरक्षा की दृष्टि से हाइड्रेंट के नोजल से जुड़ी हैं। अलग-अलग जगह हाइड्रेंट के नोजल से होज पाइप जुड़े हैं, ताकि आग लगने की स्थिति में पानी के प्रेशर से आग बुझाई जा सके।
जिला अस्पताल के सफाई कर्मचारी इस होज पाइप का इस्तेमाल शौचालयों की सफाई के लिए कर रहे हैं। इसमें सामान्य पाइप की तुलना में पानी का प्रेशर काफी अधिक होता है। सफाई कर्मचारियों को मेहनत न करनी पड़ी, इसलिए वह इस पाइप का प्रयोग करते हैं।
दमकल वाहन आने तक इसकी ली जाती है मदद
अस्पताल में रोजाना करीब 350 से 400 की ओपीडी होती है। वार्डों में सैकड़ों मरीज भर्ती रहते हैं। अस्पताल में फायर सिस्टम लगे हैं। फायर सिस्टम का काम आग लगने की स्थिति में दमकल की गाड़ियों के मौके पर पहुंचने तक आग को फैलने से बचाना है। यदि यह पाइप लीक हुए तो आग बुझाने में मदद नहीं मिलेगी।
अस्पताल में सफाई कर्मचारी होज पाइप से सफाई कर रहे हैं तो इन बातों का जवाब मैं नहीं दे सकता हूं।
- डॉ. खगेंद्र कुमार, सीएमओ
- फायर उपकरणों की देखरेख करना अस्पताल प्रशासन का कार्य है। हो सकता है सफाई कर्मचारियों ने चेक करने के लिए इसका उपयोग किया होगा।
- प्रताप सिंह राणा, एफएसओ