पूर्व विधायक और बसपा नेता मोहम्मद शहजाद ने मुख्यमंत्री हरीश रावत पर विधानसभा की गरिमा के विपरीत काम करने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री हरीश रावत से अपने परिवार को खतरा बताते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़े लोग जिले में केबिल और खनन का कारोबार कर रहे हैं।
उन्होंने जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी के खिलाफ भी जांच कराने और मुकदमा दर्ज कराने की बात कही।
बुधवार को प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत में पूर्व विधायक मोहम्मद शहजाद ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार का मुख्य उद्देश्य जिला पंचायत अध्यक्ष अंजुम बेगम को तानाशाहीपूर्ण तरीके से हटाना था। प्रदेश सरकार पर उन्होंने लोकतंत्र की हत्या करने आरोप लगाया और कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं की ओर से उन पर जो भी आरोप लगाए रहे हैं वे निराधार हैं। जिला पंचायत की वर्तमान कमेटी पर भी उन्होंने भ्रष्टाचार में लिप्त रहने के आरोप लगाए।
उनका आरोप था कि जिला पंचायत की 28 अक्तूबर को हुई बैठक में ऐसे प्रतिनिधियों को बैठाकर कोरम पूरा कराया गया जिनका बैठक से कोई सरोकार नहीं है। खुद कांग्रेस के जिलाध्यक्ष राजेंद्र चौधरी और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष बरखा रानी किस हैसियत से बैठक में मौजूद रहे इसका जवाब दिया जाना चाहिए। पंचायत चुनाव में परिसीमन और आरक्षण को लेकर घोर अनियमितता बरतने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नैनीताल, हरिद्वार और उधमसिंह नगर में बाहर से लोगों को लाकर उनको खनन के पट्टे आवंटित कराए जा रहे हैं। इस दौरान जिला पंचायत सदस्य जयंत चौहान, जयभगवान सैनी, अजय चौधरी, कमर आलम आदि मौजूद रहे।