हरिद्वार। प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना पर तलवार लटक गई है। योजना के अंतर्गत एक अप्रैल से नए कार्ड बनने थे और बीमारी के लिए धनराशि को 50 हजार से बढ़ाकर 1.75 लाख किया जाना था। दूसरे इंश्योरेंस कंपनी का भी नवीनीकरण होना था, लेकिन अभी तक कोई नया निर्देश जारी न होने से और सरकार में फेरबदल होने से मामला अधर में है। अधिकारी भी कोई जानकारी नहीं दे पा रहे हैं।
प्रदेश में मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना एक अप्रैल-2015 से लागू हुई थी। योजना के तहत पात्र परिवारों को अस्पताल में भर्ती होने पर वर्ष में एक बार 50 हजार रुपये का इलाज देना था। योजना के पैनल में सरकारी के साथ जनपद के 30 निजी अस्पतालों को भी शामिल किया गया था। इस योजना में पिछले छह महीने से नए कार्ड बनने बंद थे। वहीं दूसरी ओर पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र नेगी योजना के तहत 50 हजार की धनराशि को 1.75 लाख रुपये करने की घोषणा कर चुके थे। यह एक अप्रैल से बढ़ने थे और छूटे हुए पात्र परिवारों के कार्ड भी बनाए जाने थे। तत्कालीन राज्य सरकार इसकी घोषणा तो कर चुकी थी, लेकिन कोई शासनादेश जारी नहीं किया गया था। इससे अब प्रदेश में सरकार की उठापटक में योजना अधर में लटकती हुई नजर आ रही है। अधिकारी भी संशय में है कि एक अप्रैल से योजना का लाभ भी मिलेगा या नहीं। क्योंकि जिस इंश्योरेंस कंपनी को क्लेम की धनराशि जारी करनी होती है उसका भी नवीनीकरण नहीं हुआ है। कंपनी को भी एक 31 मार्च-2016 तक कार्य करने का अनुबंध हुआ है। ऐसे में योजना का लाभ एक अप्रैल से मिलने के आसार नहीं है।
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डेढ़ लाख बने कार्ड
मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत जनपद में एक लाख 48 हजार 954 कार्ड बने हुए है। अभी करीब एक लाख कार्ड बनने की संभावना लगाई जा रही थी।
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तीन श्रेणी के लोग नहीं
मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना में 1350 तरह की प्राथमिक और गंभीर बीमारियों के उपचार की व्यवस्था शामिल है। आयकर दाता, पेंशनर्स और सभी सरकारी कर्मचारी योजना के दायरे से बाहर रखे गए हैं।
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योजना और इंश्योरेंस कंपनी के नवीनीकरण संबंधी कोई अनुबंध के निर्देश जारी नहीं है। दूसरे यह भी स्थिति स्पष्ट नहीं है कि एक अप्रैल से योजना का पूर्व कार्ड धारकों को इलाज मिलेगा या नहीं। इसकी फाइल को स्वीकृति नहीं मिली थी। यदि कोई दिशा निर्देश नहीं मिले तो योजना का लाभ केवल 31 मार्च तक ही मिलेगा।
राहुल जुगरान, प्रभारी बीमा योजना।