रोडवेज बस अड्डे के अलावा शहर में कई स्थानों पर बस स्टॉपेज से यात्री बसों में सवार होते हैं। वहीं, कुछ स्टॉपेज ऐसे हैं जहां सुविधाओं का अभाव है। यात्रियों को धूप-बारिश से बचने और बैठने तक के इंतजाम नहीं है। यात्री धूप में खड़े होकर ही बसों का इंतजार करते हैं। यहां तक की कोई साइन बोर्ड भी नहीं लगे हैं।
ज्वालापुर में पहले जटवाड़ा पुल के पास बस स्टॉपेज था। फोरलेन निर्माण के बाद बसें हाईवे से निकलने लगीं। अब हाईवे पर हरिलोक तिराहा के पास ही बसें रुकती हैं। यहां जगह होने के बावजूद भी यात्रियों के लिए धूप और बारिश से बचाव के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। इससे पहले जटवाड़ा पुल के पास भी ऐसी ही स्थिति थी। इसके अलावा सिंहद्वार पर बने स्टॉपेज पर ही यही हालत है।
ज्वालापुर में प्रतिदिन सैकड़ों यात्री रोडवेज बस में सवार होते हैं। यात्रा से पहले उन्हें धूप में तपना पड़ता है। यहां नाम का बस स्टॉपेज बना है। वहीं, ऋषिकुल तिराहे के पास बने बस स्टॉपेज पर एक संस्था ने यात्रियों के लिए बैंच लगवाकर शेड बनवाई है। क्योंकि, उत्तराखंड परिवहन निगम के पास स्टॉपेज पर ऐसे इंतजाम के लिए कोई बजट नहीं मिलता है।
क्या कहते हैं लोग
हरिलोक तिराहे पर बने बस स्टॉपेज पर यात्रियों को धूप और बारिश के दौरान दिक्कतें होती हैं। यहां बारिश, धूप से बचाव के लिए कोई इंतजाम नहीं है। बसों का इंतजार करने के दौरान यात्रियों को परेशानी होती है।
- फिरोज अहमद
बस स्टॉपेज पर यात्रियों के लिए धूप, बारिश से बचाव के इंतजाम होने चाहिए। साइन बोर्ड भी लगाए जाने चाहिए। जिससे सभी बसें स्टॉपेज पर ठहर सकें। अधिकांश बसें सीधी निकल जाती है।
- अभिषेक मित्तल
लंबे समय से बस स्टॉपेज की समस्या ज्यो की त्यो बनी हुई है। जटवाड़ा पुल के पास पहले स्टॉपेज था, लेकिन हाईवे पर फ्लाईओवर बनने के बाद बसों को बाहर से भेजा जाने लगा। अब बसें हाइवे पर हरीलोक तिराहे के पास ही रुकती हैं। यहां धूप में ही लोगों को खड़ा होना पड़ता है।
- रमा अग्रवाल
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वर्जन
सभी स्टॉपेज पर बसों का ठहराव होता है। जहां बोर्ड नहीं लगे हैं, वहां लगवाए जाएंगे। साथ ही शेड या बैंचों की व्यवस्था के लिए परिवहन निगम के पास अलग से कोई बजट नहीं होता है। यात्रियों को किसी तरह की दिक्कत न आए, इसके लिए पूरा ख्याल रखा जाता है। कई जगह स्टॉपेज पर सामाजिक संस्था या फिर नगर निगम की ओर से शेड, बैंचों की व्यवस्था की गई है।
- सुरेश सिंह चौहान, सहायक महाप्रबंधक, उत्तराखंड परिवहन निगम, हरिद्वार