कांवड़ पटरी मार्ग आस्था का पथ बन चुका है। हरकी पैड़ी से जलभर कर गुजरते कांवड़िए मनोकामना लिए शिवालयों की तरफ बढ़ने लगे हैं। इन्हीं के बीच सोमवार को ऐसे पति-पत्नी और एक बहन भी हैं जो मां की सेहत की सलामती को कांवड़ लेकर पहुंचे।
सोमवार दोपहर सिंहद्वार चौक के निकट कांवड़ पटरी मार्ग पर बच्चों के साथ गंगाजल लेकर लौटते तीन कांवड़ियों पर लोगों की नजर गई। भरी गर्मी में पसीने से तर-बतर दिल्ली के शाहदरा निवासी राजा, उनकी पत्नी गीता और बहन चंदा अपने-अपने बच्चों के साथ कांवड़ लेकर जा रहे थे।
बेड शीट बेचने वाले राजा और चंदा ने बताया कि मां की बिगड़ती सेहत की सलामती और परिवार की खुशहाली के लिए उन्होंने अपने-अपने बच्चों संग हरकी पैड़ी से जलभरा है। राजा और उनकी बहन ने बताया कि हरिद्वार से शाहदरा तक का तकरीबन 202 किलोमीटर का मार्ग भोले का नाम जपते-जपते पार करेंगे।
मां गंगा की इच्छा रही तो फिर अगली बार सावन में गंगाजल लेने आएंगे। राजा ने बताया कि बहन के साथ मिलकर पिछले पांच वर्ष से लगातार कांवड़ ले जा रहा हैं। इस बार पत्नी और बच्ची को साथ लेकर आया हूं। ताकि इन्हें भी इस धार्मिक यात्रा का पता चले।