गंगा में खनन के विरोध एक तरफ मातृसदन का आंदोलन चल रहा है। दूसरी तरफ गंगा में खनन का तांडव बराबर चल रहा है। खनन माफिया शासन-प्रशासन के दावों को आइना दिखा रहे हैं। लापरवाही का आलम यह है कि रविवार रात मातृसदन में प्रशासन के दल-बल के साथ हुए हंगामे के बाद भी बिशनपुर और भोगपुर में खनन जारी है। पोकलैंड एवं जेसीबी दिनरात गरज रहीं हैं।
गंगा में खनन पर पूर्ण प्रतिबंध और क्रशरों पर कार्रवाई की मांग को लेकर मातृसदन के ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद का अनशन 23 दिन तक चला। उनके बाद स्वामी शिवानंद अनशन पर हैं। मातृसदन के आंदोलन को एक महीना पूरा हो चुका है लेकिन, इस बीच खनन पर कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई। इसके उल्ट रायवाला से भोगपुर तक बंद पड़े खनन को हरी झंडी दे दी गई। स्वामी शिवानंद के जल छोड़ने पर प्रशासन के हाथ-पांव फूले तो उन्हें जबरन उन्हें उठाने के इंतजाम भी किए गए। प्रशासन के साथ हुई वार्ता में परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद ने खनन बंद करने के लिए 48 घंटे का समय दिया और जल ग्रहण किया लेकिन, धरातल पर खनन रोकने के लिए प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया।
सूत्र बताते हैं कि बिशनपुर में एक क्रशर संचालक ने कुछ किसानों की जमीनें पट्टे पर ली हैं। अपनी और किसानों की जमीन मिलाकर बड़े पैमाने पर वह दिनरात खनन कर रहे हैं। मंगलवार को भी इस पर दिनभर खनन होता रहा। यही स्थिति भोगपुर के तीन स्टोन क्रशरों के आसपास है। क्रशर संचालकों ने अपनी मशीनें गंगा में उतारी हुईं हैं। मातृसदन ने तहसीलदार एवं एसडीएम को इस बाबत सूचना भी दी। उसके बाद भी कार्रवाई नहीं की गई। मातृसदन के आंदोलन के दौरान ही जब खनन पर रोक नहीं लग रही है तो अन्य दिनों में क्या होता होगा इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।