प्रदेश सरकार ने इस बार भी गन्ने के रेट में कोई इजाफा नहीं किया है। पिछले साल की तरह 327 रुपये प्रति कुंतल का रेट दिया है। सरकार के इस रवैये से किसानों में निराशा है। किसानों का कहना है कि एक साल में बिजली, खाद और कृषि उपकरण के दाम बढ़े हैं और सरकार ने गन्ने के मूल्य में एक रुपया भी नहीं बढ़ाया।
पिछले डेढ़ महीने से किसान बिना गन्ना मूल्य घोषित हुए बिना ही गन्ने को चीनी मिलों पर डाल रहा है। अब मंगलवार को राज्य सरकार ने गन्ने का दाम घोषित किया तो किसान मायूस हो गए। राज्य सरकार ने सामान्य प्रजाति के गन्ने का मूल्य 317 रुपये प्रति क्विंटल और अगेती प्रजाति के गन्ने का मूल्य 327 रुपये नियत किया। मूल्य की घोषणा होने की सूचना मिलते ही किसानों में रोष फैल गया है। जिले के किसानों को उम्मीद थी राज्य में गन्ना मूल्य कम से कम 350 रुपये प्रति क्विंटल घोषित होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसमें से भी सरकार किसान से किराये के रुप में 11 रुपये प्रति क्विंटल काट लेती है, जबकि यूपी में किराये के 8 रुपये काटे जाते हैं, ऐसे में प्रदेश में किसानों को यूपी से भी कम मूल्य मिलेेगा।
प्रदेश सरकार को यूपी की तुलना में ज्यादा मूल्य देना चाहिए था। सरकार ने ऐसा नहीं करके संवेदनहीन होने का परिचय दिया है। सरकार के इस रवैये से किसानों में नाराजगी है।
- धर्मेंद्र प्रधान, किसान ग्राम अम्बूवाला।
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किसान की आय दोगुना करने की बात करते है, लेकिन यहां तो पूर्व के सालों के मुकाबले में लागत बढ़ने के बावजूद उपज का भाव भी नहीं बढ़ा रहे हैं। उर्वरक में डीएपी का 50 किलोग्राम का कट्टा 1000 रुपये का था, लेकिन 1200 रुपये का हो गया। अब गन्ने के मूल्य में सरकार ने किसान को लॉलीपॉप थमा दिया है।
- प्रवीण सैनी, किसान अहमदपुर ग्रंट
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राज्य सरकार ने किसानों का अहित किया है। फसल के उत्पादन में लागत बढ़ी है उसके हिसाब से गन्ने का मूल्य प्रति क्विंटल 450 रुपये होना चाहिए था। पिछली लोकसभा में कृषि मंत्री ने गन्ना उपज में प्रति क्विंटल 295 रुपये आंकी थी और डेढ़ गुणा बढ़ाकर देेने की घोषणा की थी, लेकिन अपने वादे पर भी खरे नहीं उतर रहे। - पदम सिंह भाटी, प्रदेश अध्यक्ष, राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन।
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वर्तमान में चीनी के दाम इतने कम हैं कि यदि चीनी मिलों पर सरकार भाव बढ़ाकर थोप देगी तो पिछले बकाया की तरह नया भुगतान भी देना मुश्किल हो जाएगा। ऐसी परिस्थितियों में सरकार, चीनी मिलें, किसान सभी लाचार हैं। चीनी मिल प्रबंधन बढ़े हुए रेट को देने में असमर्थता जता रहे हैं। यदि गन्ने का तत्काल भुगतान होता रहेगा तो भी किसानों के लिए ये रेट काफी साबित होगा।
- राकेश राजपूत, अध्यक्ष, राज्य किसान आयोग।