ये पहला मौका नहीं है जब कोई विवादित धार्मिक संपत्ति बड़ा मुद्दा बन गई हो। पहले भी यहां कई धार्मिंक संपत्तियों पर विवाद की काली छाया पड़ चुकी है। ताजातरीन मामला बेशकीमती प्राचीन अवधूत मंडल आश्रम का ही है। यहां अब सरकारी ताला जड़ा हुआ है।
निर्मल विरक्त कुटिया से सीधे सीएम हरीश रावत का दामन दागदार करने की कोशिश की गई है। पूर्व सांसद सतपाल महाराज ने एक तरह से सीधे- सीधे प्रदेश सरकार को ही चुनौती दे डाली है। बड़ी बात यह रही कि पूर्व सांसद ने एसएसपी एवं सीएम के सलाहकार रंजीत रावत का नार्को टेस्ट पॉजीटिव न आने पर सक्रिय राजनीति से संयास ले लेने की बात कहकर उथल- पुथल मचा दी है। ये बात उन्होंने तब कही है जब उनका नाम भाजपाई लॉबी में सीएम के दावेदारों में भी गिना जा रहा है।
निर्मल विरक्त कुटिया ही नहीं हरिद्वार में जहां नजर दौड़ाओं वहीं विवादित संपत्ति का खेल सामने आ आएगा। दरअसल कौडियों के दाम ली गई या दान में मिली ये संपत्तियां अब बेशकीमती हो चुकी है। यही कारण है कि संपत्तियों पर कब्जे को लेकर शह और मात के खेल चलते ही रहते है। संयासी, नेता, भूमाफियाओं की तिकड़ी अपने हित साधने में लगी रहती है। निर्मल विरक्त कुटिया भी उन्हीं संपत्ति में से एक है। सिख समाज के धर्मस्थल की इस संपत्ति के प्रकरण में सिख ही नहीं बल्कि बैर बिरादरी के लोग भी कमान संभाले हुए है।
रुडकी का शराब कारोबारी चर्चा में
हरिद्वार। निर्मल विरक्त कुटिया प्रकरण में रुडकी के एक शराब कारोबारी की महत्वपूर्ण भूमिका सामने आ रही है। दरअसल ये शराब कारोबारी एक बड़े साहब का खासमखास है और साहब के बंगले पर भी शराब कारोबारी का सिक्का चलता है। पूरे खेल के पीछे इस शराब कारोबारी की संलिप्तता की बू आ रही है। यदि प्रकरण की ढंग से जांच होती है तब इस कारोबारी का चेहरा बेनकाब हो सकता है। ब्यूरो