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Haridwar News: आधुनिक मनोवैज्ञानिक चुनौतियों का समाधान भारतीय प्राचीन ज्ञान

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हरिद्वार। देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में दो दिवसीय इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च (आईसीएसएसआर) की ओर से आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी का रविवार को समापन हो गया। संगोष्ठी में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं शोध संस्थानों से आए शिक्षाविदों, शोधार्थियों और विशेषज्ञों ने मानसिक स्वास्थ्य, स्वदेशी ज्ञान परंपराओं और सामाजिक समावेशन से जुड़े विविध विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
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समापन सत्र के मुख्य अतिथि देसंविवि के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि वर्तमान समय में मानसिक स्वास्थ्य वैश्विक स्तर पर एक गंभीर चुनौती के रूप में उभर रहा है। ऐसे में भारतीय संस्कृति और परंपरा में निहित स्वदेशी ज्ञान प्रणालियां मानसिक संतुलन, सामाजिक सामंजस्य और समग्र कल्याण के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकती हैं। कहा कि भारतीय दर्शन, योग, ध्यान तथा जीवन मूल्यों पर आधारित परंपराएं केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक और सामाजिक समस्याओं के समाधान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

दो दिवसीय संगोष्ठी का समापन स्वदेशी ज्ञान, सामाजिक समावेशन और मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में अनुसंधान, सहयोग और संवाद को आगे बढ़ाने की सामूहिक प्रतिबद्धता के साथ हुआ। वक्ताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि एक मानसिक रूप से स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए सामाजिक समावेश को जमीनी स्तर पर लागू करना होगा। कार्यक्रम के अंत में संगोष्ठी के सफल आयोजन के लिए आयोजकों, वक्ताओं और प्रतिभागियों का आभार जताया।
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