इसके अलावा अन्य समितियों के शव वाहनों को फोन किया तो किसी ने रिसीव तक नहीं किया। विक्की सैनी ने बताया कि परिजन आसपास के अस्पतालों से एंबुलेंस लाने के लिए पहुंचे, लेकिन सभी ने इनकार दिया।
न्यू हरिद्वार के अस्पताल संचालकों ने एंबुलेंस देने का आश्वासन दिया, लेकिन जब शव को लेकर वहां पर पहुंचे तो एंबुलेंस नहीं मिली और डॉक्टर ने फोन रिसीव नहीं किया। इससे निराश लोग अर्थी को कनखल श्मशान तक कंधों पर ही ले जाने को मजबूर रहे।