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नहीं आई 108 एंबुलेंस, सड़क पर जना बच्चा

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काम की तलाश में देहरादून से हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर पति के साथ पहुंची महिला को प्रसव पीड़ा होने लगी। शहर में अंजान दंपती रास्ता भटक गए और महिला अस्पताल जाने की बजाय बिल्वकेेश्वर रोड पहुंच गए। यहां 108 एंबुलेंस के समय से न पहुंचने पर महिला ने सड़क पर ही बच्चे को जन्म दिया। बाद में पहुंची एंबुलेंस से जच्चा-बच्चा को महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
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बिहार के मोतीहारी जनपद के गांव डुमरी के रहने वाले रामबाबू देहरादून के सहस्रधारा रोड पर राज मिस्त्री का काम करते थे। यहां काम समाप्त होने के बाद वह अपनी गर्भवती पत्नी रीना के साथ काम की तलाश में हरिद्वार आए थे। जानकारी के अनुसार बृहस्पतिवार की रात मजदूर दंपती ट्रेन से बच्चों के साथ हरिद्वार स्टेशन पहुंचे। स्टेशन पर उतरने के दौरान महिला रीना को प्रसव पीड़ा होने लगी। लोगों ने उन्हें महिला अस्पताल जाने का सुझाव दिया। पर दंपति शहर में पहली बार आने के कारण महिला अस्पताल जाने की बजाय बिल्वकेश्वर रोड पर मेला अस्पताल के ब्लड बैंक के बाहर सड़क पर पहुंच गए। यहां महिला को प्रसव पीड़ा तेज हो गई।
इस दौरान किसी ने 108 एंबुलेंस पर फोन किया, लेकिन जब तक एंबुलेंस आती, तब तक महिला ने एक बच्चे को जन्म दे दिया। बाद में एंबुलेंस के पहुंचने पर जच्चा-बच्चा को उसमें रखा गया। इसके बाद रात में 02:50 बजे महिला अस्प्ताल में जज्जा-बच्चा को भर्ती कराया।
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रात में दो बजे महिला की डिलीवरी होने की कॉल आई थी। जिससे 2:20 मिनट पर एंबुलेंस मौके पर उपलब्ध करा दी गई थी। पर तब तक बच्चे का जन्म हो चुका था। प्रसव के बाद का कार्य भी एंबुलेंस में ही किया गया था। बाद में सुरक्षित उन्हें महिला अस्पताल में भर्ती करा दिया गया था।
महिला का यह सातवां बच्चा
बातचीत में महिला ने बताया कि उसका यह सातवां बच्चा है। जिनमें तीन बच्चों की पहले मौत हो चुकी है। अब एक और बालक के जन्म लेने से उसके तीन बेटे और एक बेटी है।
पिता ने अपने कपड़ों बच्चे को ढका
परिवार बेहद गरीब है। यही कारण है कि वह महिला अस्पताल तक के लिए रिक्शा भी नहीं कर सके और पैदल ही निकल पड़े। अस्पताल की तलाश में लगभग एक किलोमीटर तक पैदल ही गर्भवती महिला भी चलती रही। जिससे बच्चे के सड़क पर जन्म लेने के बाद पिता ने अपने कपड़े उतारकर उसके शरीर को ढका।
एंबुलेंस कर्मियों ने दिए 30 रुपये
गर्भवती महिला को अस्पताल में भर्ती कराने के लिए एंबुलेंस कर्मी जब मौके पर पहुंचे तो वहां महिला और उसके परिवार की गरीबी की हालत देखकर दंग रह गए। महिला और उसके बच्चों के लिए चाय पीने के लिए 30 रुपये उन्हें अपनी जेब से दे दिए।
ऐसे हुई एंबुलेंस पहुंचने में देरी
बताया जाता है कि जब 108 एंबुलेंस को कॉल की गई तो वहीं पर नजदीक मेला अस्पताल की एंबुलेंस सेवा को जाने के लिए कहा गया। पर चालक ने जहर का सेवन करने वाले मरीज को अस्पताल में भर्ती कराने के बाद उसकी गाड़ी से उल्टियां साफ करने का हवाला देते हुए ले जाने से इनकार कर दिया। ऋषिकुल में खड़ी रहने वाली एंबुलेंस से संपर्क किया गया तो वह तेल भरवाने के लिए जा रही थी। बाद में बहादराबाद थाने में खड़ी एंबुलेंस जो अस्पताल में ही किसी को छोड़ने के लिए आई थी, उसे मौके पर भेजा गया।
अस्पताल में भर्ती नवजात को जरूरी वैक्सीनेशन कर दिया गया है। दोनों को अस्पताल में मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाएं दी जा रही हैं। महिला और उसका बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ हैं।
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