कोविड की दूसरी लहर नियंत्रित होने लगी है। हरिद्वार जिले के तीनों डेडिकेटेड कोविड हॉस्पिटल (डीसीएच) कोरोना मरीजों से मुक्त हो गए हैं। डेडिकेटेड कोविड हेल्थ सेंटरों (डीसीएचसी) में 13 और कोविड केयर सेंटरों में केवल तीन मरीज हैं। मरीजों की मौतों का सिलसिला भी ठहर गया है। इससे आम लोगों के अलावा कोविड अस्पतालों में लगातार ड्यूटी करने वाले डाक्टरों और स्टाफ को बड़ी राहत मिली है।
जनवरी में मकर संक्रांति के स्नान के बाद से धर्मनगरी में संक्रमण का प्रसार बढ़ा। कुंभ आयोजन की अवधि में कोरोना ने कहर बरपाया। कुंभ समापन के बाद तक मौत का सिलसिला चलता रहा। अप्रैल और मई माह में अस्पतालों में बेड और श्मशान में अंत्येष्टि के लिए जगह कम पड़ी। ऑक्सीजन के अभाव में मरीजों ने दम तोड़ा। जून से स्थिति नियंत्रित होने लगी। जुलाई पहले सप्ताह के शनिवार को जिले के तीनों डेडिकेटेड कोविड हॉस्पिटल (डीसीएच) कोविड मरीजों से मुक्त हो गए। इन्हीं अस्पतालों में मरीजों का सबसे अधिक दबाव रहा। जिले के 23 डेडिकेटेड कोविड हेल्थ सेंटरों में भी मात्र 13 मरीज हैं। जबकि 42 कोविड केयर सेंटरों में तीन मरीज भर्ती हैं।
सैंपलिंग के सापेक्ष नए मरीजों की संख्या नगण्य हो गई है। इससे आम आदमी से ज्यादा कोविड अस्पतालों और कोविड केयर सेंटरों में लगातार ड्यूटी करने वाले डाक्टर से लेकर वार्ड ब्वाय ने राहत ली है। मेला अस्पताल की नोडल अधिकारी डा. निशात अंजुम बताती हैं, जनवरी से लेकर जून मध्य तक मरीजों का काफी अधिक दबाव रहा। चिकित्सकों से लेकर वार्ड ब्वाय ने अपनी जिम्मेदारी निभाई है। मरीजों के इलाज में अधिकतर स्टाफ खुद भी संक्रमण की चपेट में आया। बावजूद स्टाफ ने हिम्मत नहीं हारी। मरीज कम होने से स्टाफ खुद को तनावमुक्त महसूस कर रहा है।
3 जुलाई की कोविड मरीजों और सैंपलिंग की स्थिति
- नए मरीज मिले पांच
- तीन डीसीएच में कोई मरीज भर्ती नहीं
- 23 डीसीएचसी में 13 मरीज भर्ती
- 42 कोविड केयर सेंटरों में मात्र तीन मरीज
- होम आइसोलेशन 54 मरीज
- कुल एक्टिव मरीज 70
- सैंपलिंग 4879