महाकुंभ के लिए अखाड़ों ने अपने पुरानी छावनियों को नए सिरे से तैयार करने का काम शुरू कर दिया है। अखाड़ों में आने वाले बाबाओं को ठहराने के लिए भवनों का विस्तार भी किया जा रहा है। अखाड़ों के पुराने छावनी स्थलों को नागा संन्यासियों के लिए अनुकूल बनाया जाएगा।
अखाड़ा परिषद लंबे समय से कुंभ मेला क्षेत्र में स्थान आवंटित करने की मांग कर रही है। मेला प्रशासन की ओर से होने वाले इस कार्य में देरी की संभावना है। गंगा पार जहां मेला क्षेत्र का विस्तार किया जा रहा है, वहां अभी तक स्थल चयन भी नहीं हो पाया है। यही वजह है कि जिन अखाड़ों में अधिक साधुओं के आने आसार हैं, वे अपनी पुरानी छावनियों को सजाने में जुट गए हैं।
अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि ने बताया कि शहर के बाहर से आए साधु सन्यासियों को परंपरागत रूप से अखाड़ा प्रवेश कराने की परंपरा कुंभ पर निभाई जाती है। देश के अनेक भागों से रमता पंच अपने लाव लश्कर के साथ अक्तूबर के महीने से हरिद्वार पहुंचने लगेंगे। अखाड़ों की पेशवाईयां और धर्मध्वजाएं भी अखाड़ों के मुख्यालयों में ही आयोजित की जाएंगी।
ऐसे में नागा संन्यासियों के धूने जहां लगेंगे, वहां होने वाला निर्माण कार्य अब शुरू कर दिया गया है। बारिश के सीजन से पहले इस कार्य को पूरा कर लिए जाने की संभावना है। मेला प्रशासन की ओर से मेला क्षेत्र में जमीन आवंटित होने के बाद अखाड़े वहां अपने महामंडलेश्वरों को स्थान उपलब्ध कराएंगे।