- वन अधिनियम उल्लंघन के दो मामलों में कोर्ट ने जमानत याचिकाएं की खारिज
- जांच में सहयोग न करने और अपराध की गंभीरता को माना आधार
अदालत से
रोशनाबाद। वन अधिनियम उल्लंघन के दो अलग-अलग मामलों में प्रभारी सत्र न्यायाधीश चंद्रमणि राय ने आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत ने अपराध की गंभीरता और जांच में सहयोग न करने को आधार बनाते हुए आरोपियों को राहत देने से इन्कार किया। पहला मामला चिड़ियापुर रेंज में सागौन के तीन पेड़ों के अवैध कटान का है। आरोपी इनाम निवासी गुज्जर बस्ती गैण्डीखाता की अग्रिम जमानत याचिका निरस्त कर दी गई। अभियोजन के अनुसार 28 मार्च को गश्त के दौरान वन कर्मियों ने आरोपियों को पेड़ काटते देखा, जिसमें यूसुफ को मौके से गिरफ्तार किया गया जबकि इनाम फरार हो गया। अदालत ने आरोपी द्वारा जांच में सहयोग न करने और अपराध की गंभीरता को देखते हुए याचिका खारिज की। दूसरा मामला रुड़की रेंज में खैर की लकड़ी की तस्करी से जुड़ा है। आरोपी जावेद अंसारी निवासी ग्राम रामपुर, रुड़की थाना कोतवाली गंगनहर की अग्रिम जमानत याचिका भी खारिज कर दी गई। 11 अप्रैल को भगवानपुर क्षेत्र में वन विभाग ने एक ट्रक को टोल प्लाजा के पास रोककर तलाशी ली, जिसमें अवैध खैर की लकड़ी के 123 नग बरामद हुए। ट्रक चालक और साथी फरार हो गए थे। आरसी और ड्राइविंग लाइसेंस के आधार पर जावेद अंसारी का नाम सामने आया। अदालत ने फरार होने और अवैध परिवहन के आरोपों को देखते हुए याचिका खारिज कर दी।