रुड़की। अवैध खनन पर लगाम लगाने के लिए जिला प्रशासन ने 13 सितंबर को टास्क फोर्स का गठन किया। लेकिन गठन के एक सप्ताह बाद भी अधिकारी अपने दफ्तर से नहीं निकले। ऐसे में साफ है कि अवैध खनन रोकने के लिए शुरू किया जाने वाला अभियान कागजों में ही सिमट गया है।
जिला प्रशासन ने अवैध खनन को रोकने के लिए 13 सितंबर को टास्क फोर्स का गठन किया। टास्क फोर्स का सदस्य डीएफओ हरिद्वार, सीओ सिटी, एआरटीओ प्रवर्तन व उपनिदेशक खनन और भूतल को बनाया गया। बाद में 17 सितंबर को डीएम ने टास्क फोर्स में सीडीओ को भी शामिल कर दिया गया। सीडीओ को टास्क फोर्स का अध्यक्ष बनाया गया। एक सप्ताह बीत गया, लेकिन टास्क फोर्स के सदस्य अपने कार्यालयों से बाहर तक नहीं निकले।
खनन के खिलाफ जो भी कार्रवाई हो रही है वह पुलिस और तहसील के अधिकारी कर रहे हैं। यह टास्क फोर्स में शामिल नहीं।
सदस्यों को नहीं पता कि वह टास्क फोर्स के सदस्य
डीएम द्वारा गठित टास्क फोर्स के सदस्यों को खुद हीं नहीं मालूम कि वह टास्क फोर्स के सदस्य हैं। ऐसे में टास्क फोर्स के गठन पर अंगुली उठ रही हैं। डीएफओ हरिद्वार डीएम द्वारा गठित टास्क फोर्स के सदस्य हैं। जब डीएफओ से टास्क फोर्स के विषय में जानकारी चाही गई तो उन्होंने बताया कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है।
डीएम द्वारा टास्क फोर्स का गठन किया गया है। टास्क फोर्स का मुझे अध्यक्ष बनाया गया है। बहुत जल्द अवैध खनन के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा।
- वीएस धानिक, सीडीओ