फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कांवड़ियों लाखों में, आरक्षित बेड छह

Mon, 29 Jul 2013 05:34 AM IST
Haridwar
विज्ञापन
विज्ञापन
हरिद्वार। नाम मेला अस्पताल है, लेकिन 100 बेड के इस अस्पताल की सुध कांवड़ मेले में भी नहीं ली गई। जिला अस्पताल में कांवड़ मेले के लिए महज छह बेड आरक्षित किए गए हैं। जबकि कांवड़ियों की संख्या लाखों में रहेगी। अधिकारियों का कहना है बड़ी इमरजेंसी में मेला अस्पताल का इस्तेमाल किया जाएगा। लेकिन, इससे निपटने के लिए न पर्याप्त डाक्टर हैं और न दवाएं हैं। ऐसे में ऐन वक्त पर परेशानी होना लाजिमी है।
विज्ञापन

पंचक खत्म होते ही कांवड़ियों की भीड़ बढ़ने का अनुमान है। स्वास्थ्य सेवाओं के लिहाज से 13 अस्थाई स्वास्थ्य शिविर लगाए गए हैं। लेकिन इनमें सिर्फ फस्टएड सुविधा है। गंभीर मरीज को जिला अस्पताल भेजा जा रहा है। वैसे जिला अस्पताल 60 बेड का है, लेकिन इनमें से फिलहाल इमरजेंसी वार्ड के छह बेड कांवड़ मेले के लिए आरक्षित किए हुए हैं। बड़ी इमरजेंसी में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर फोकस जिला अस्पताल पर रहेगा। जबकि मेलों को लेकर बने मेला अस्पताल का इस्तेमाल किया जा सकता था, कांवड़ को लेकर इमरजेंसी सेवाएं संचालित की जा सकती थी, आपात स्थित में अस्पताल के पास 100 बेड उपलब्ध हैं। पर्याप्त नर्सिंग स्टाफ भी उपलब्ध है। दवाओं और डाक्टरों की व्यवस्था कर कांवड़ के बहाने मेला अस्पताल पुनर्जीवित किया जा सकता था। इससे जिला अस्पताल में रुटीन के मरीज भी प्रभावित नहीं होते। अब कहा जा रहा है कि बड़ी इमरजेंसी के वक्त मेला अस्पताल को प्रयोग में लाया जाएगा, लेकिन जरूरी चीजों की व्यवस्था कहां से होगी इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
इनसेट
वेंटीलेटर और आईसीयू उपकरण फांक रहे धूल
कुंभ मेले के लिए बना मेला अस्पताल तकनीकी चिकित्सा उपकरणों के मामले में सबसे संपन्न है। लेकिन देखरेख के अभाव में वेंटीलेटर और आईसीयू उपकरण तक धूल फांक रहे हैं। डाक्टरों के अभाव में इनका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। अस्पताल के पास जरूरी दवाओं तक का टोटा है। कभी जिला अस्पताल तो कभी सीएमओ कार्यालय से दवाएं मांगकर अस्पताल चल रहा है।
विज्ञापन

कोट
हमारे पास जो भी संसाधन हैं, उनसे कांवड़ मेले में बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। कांवड़ के मद्देनजर छह बेड का वार्ड आरक्षित किया गया है। सभी डाक्टरों को ऑनकॉल उपस्थित रहने और हैडक्वार्टर न छोड़ने को कहा गया है। - डा. राजेश गुप्ता, कार्यवाहक प्रमुख अधीक्षक (जिला अस्पताल)
कोट
कांवड़ मेले के लिए बजट या संसाधन नहीं मिले हैं। हालांकि अस्पताल कांवड़ मेला को लेकर अलर्ट है। मौजूदा डाक्टर और स्टाफ बड़ी इमरजेंसी की स्थिति में जिला अस्पताल में मदद करेंगे। ऐसे हालात पैदा होते हैं तो मेला अस्पताल का इस्तेमाल किया जा सकता है।
विज्ञापन

- डा. संदीप निगम, चिकित्सा अधीक्षक (मेला अस्पताल)
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें