हरिद्वार। मातृ सदन में गंगा रक्षा के लिए अनशन कर रहे संत गोपालदास को बुधवार को जिला प्रशासन ने जबरन उठाकर एम्स ऋषिकेश में भर्ती करा दिया। इस दौरान सिटी मजिस्ट्रेट मनीष सिंह की मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद और ब्रह्मचारी दयानंद के बीच जमकर नोकझोंक हुई। वहीं संत गोपालदास ने खून से पत्र लिखकर भारत को रहने के लिए असुरक्षित बताया।
गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए 117 दिनों से अनशनरत संत गोपालदास मंगलवार को ही एम्स से डिस्चार्ज होकर मातृसदन पहुंचे थे। मंगलवार को ही उन्होंने संथारा साधना करने का एलान किया था। बुधवार को करीब तीन बजे तहसीलदार सुनैना राणा चिकित्सकों की टीम और पुलिस बल के साथ मातृसदन पहुंचीं। तहसीलदार और पुलिस के आते ही संत गोपालदास ने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया। तहसीलदार ने संत गोपालदास से बाहर आकर मेडिकल जांच कराने का अनुरोध किया लेकिन वह नहीं माने। तहसीलदार और पुलिस मातृसदन से लौट आई।
एक घंटे बाद सिटी मजिस्ट्रेट मनीष कुमार सिंह और सीओ कनखल स्वप्न किशोर सिंह मातृ सदन पहुंचे। उन्होंने संत गोपालदास को दरवाजा न खोलने की स्थिति में दरवाजा तोड़ने की चेतावनी। लोहे का दरवाजा काटने के लिए कटर भी मंगवा दिया था। इसके बाद गोपालदास ने खुद ही दरवाजा खोलकर भागने का प्रयास किया। इस दौरान कई बार पुलिस और संत गोपालदास के बीच छिनाझपटी हुई। आखिर पुलिस ने उनको काबू करते हुए एंबुलेंस में बैठा दिया और एम्स ऋषिकेश ले गए। सिटी मजिस्ट्रेट मनीष कुमार सिंह ने कहा कि संत गोपालदास की जीवन रक्षा के लिए उन्हें ऋषिकेश एम्स में भर्ती कराया गया है। मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने प्रशासनिक कार्रवाई को निदंनीय बताया। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि एम्स ऋषिकेश संत गोपालदास के लिए सुरक्षित नहीं है। स्वामी सानंद की भी वहां हत्या की गई। उन्होंने कहा कि 20 अक्तूबर को वह अनशन करने की घोषणा करेंगे।
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दवा लेने से किया इनकार
ऋषिकेश। एम्स के पीआरओ हरीश कुमार थपलियाल ने बताया कि गोपालदास की चिकित्सीय जांच की गई। अभी सब ठीक है। वे अभी दवा लेने से मना कर रहे हैं। समाचार लिखे जाने तक उन्हें वार्ड में भर्ती नहीं किया गया था। पीआरओ ने बताया कि सभी जांचें हो जाने के बाद जैसे हालात होंगे वैसा किया जाएगा।
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यह है पूरा मामला
स्वामी सानंद के अनशन के समर्थन में संत गोपालदास 24 जून से आमरण अनशन पर हैं। सानंद के देहावसान के बाद वह जल पुरुष राजेंद्र सिंह के साथ मातृ सदन आए और यहां अनशन पर थे। 12 अक्तूबर की रात संत गोपालदास को प्रशासन ने एम्स ऋषिकेश में भर्ती कराया था। 13 अक्तूबर को संत गोपाल दास ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर संथारा साधना की घोषणा करते हुए साधना के दौरान किसी प्रकार का खलल न डालने की मांग की थी। 16 अक्तूबर को उन्हें एम्स से डिस्चार्ज कर दिया था। मातृसदन पहुंचकर संथारा साधना शुरू करने का विधिवत रूप से एलान करते हुए बुधवार से अनिश्चितकालीन मौन धारण करने की बात कही थी।
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गोपालदास ने खून से लिखा पत्र
सिटी मजिस्ट्रेट मनीष कुमार सिंह के पहुंचते ही संत गोपालदास ने अपनी अंगुली काटकर खून से लिखा पत्र देश के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और यूएनओ के नाम जारी किया। उन्होंने लिखा कि उन्हें अलोकतांत्रिक खौफ से आजादी चाहिए। भारत देश रहने के लिए सुरक्षित नहीं है। उन्हें किसी शरणार्थी देश में भेजा जाए या इच्छा मृत्यु की अनुमति दी जाए।
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सानंद को वापस लाओ
सिटी मजिस्ट्रेट जैसे ही मातृसदन पहुंचे तो मातृसदन के ब्रह्मचारी दयानंद ने उनसे स्वामी सानंद को वापस लाने के लिए कहा। जिसके बाद दोनों की बीच नोकझोंक हुई। इसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट स्वामी शिवानंद से मिलने के लिए जाने लगे तो मातृसदन के ही एक ब्रह्मचारी ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। सिटी मजिस्ट्रेट ने उन्हें फटकार लगाते हुए सरकारी कार्य में बाधा न डालने की हिदायत दी। इसी बात को लेकर शिवानंद की सिटी मजिस्ट्रेट की नोकझोंक हुई।