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ण्ण्ण्गंगा सभा के चुनाव पर वैधानिक संकट

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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार। पहले ही संकट में फंसे गंगा सभा के चुनाव कार्यक्रम संकट में फंस गया है। नियमानुसार चुनाव अधिकारियों की घोषणा चुनाव से ठीक छह महीने पहले करनी पड़ती है। दिसंबर में होने वाले चुनाव वयस्क मताधिकार के झमेले में फंसने तीन सदस्यीय चुनाव अधिकारियों की घोषणा नहीं हो पाई है।
गंगा सभा में इन दिनों वयस्क मताधिकार देने और न देने को लेकर संघर्ष छिड़ा हुआ है। महामंत्री रामकुमार मिश्रा के प्रयासों को तब धक्का लगा था, जब उनके ही अध्यक्ष पुरुषोत्तम शर्मा और पूर्व अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी के नेतृत्व में राजिस्ट्रार को ज्ञापन देकर चुनाव रोकने की मांग की गई थी। आरोप था कि महामंत्री चुनाव संशोधन समिति गठित किए बगैर सीधे प्रधान सभा से वयस्क मताधिकार का प्रस्ताव पारित करा रहे हैं। रजिस्ट्रार ने इस पर 11 जुलाई को कराए जा चुनाव को स्थगित कर दिया था। तब से रामकुमार मिश्रा खेमा रजिस्ट्रार को जवाब देने के लिए तैयारियों में जुटा है। उनके सहयोगियों की कई दौर की बैठकें होने के बाद भी जवाब तैयार नहीं हो पाया है। रामकुमार मिश्रा ने बताया कि जवाब देने की तैयारियां चल रही है। रजिस्ट्रार को बिंदुवार जवाब देकर वयस्क मताधिकार देने का प्रकरण हल किया जाएगा। उन्होंने माना कि चुनाव अधिकारी घोषित करने का समय बीता जा रहा है। अलबत्ता इस मसले का निदान भी शीघ्र निकाल लिया जाएगा।
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उधर, प्रदेश के वरिष्ठ विहिप नेता एवं गंगा सभा कार्यकारिणी सदस्य वीरेंद्र कीर्तिपाल ने मिश्रा खेमे की सख्त आलोचना की है। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष पुरुषोत्तम शर्मा और महामंत्री रामकुमार मिश्रा साढ़े तीन वर्ष से गंगा सभा चलाने में पूरी तरह विफल रहे हैं। चुनाव नजदीक आने पर अब वे वयस्क मताधिकार का राग छेड़कर अपनी विफलता पर पर्दा डालना चाहते हैं। तीर्थ पुरोहित समाज किसी भी अनियमितता को बर्दाश्त नहीं करेगा। चुनाव आने पर पुरोहित समाज वर्तमान पदाधिकारियों को सबस सिखाएगा।
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