हरिद्वार। टैक्स जमा नहीं करने वाले होटल और धर्मशाला संचालकों पर नगर निगम शिकंजा कस दिया है। निगम क्षेत्र में लगभग 526 होटल और 265 धर्मशालाएं पंजीकृत हैं। अब निगम केवल उन्हीं होटल और धर्मशालाओं के लाइसेंस नवीनीकरण करेगा, जिनका टैक्स जमा है।
होटल और धर्मशाला मालिकों को लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए पहले वित्तीय वर्ष 2018-19 का टैक्स जमा कराकर उसकी रसीद (पावती) लाइसेंस जारी करने वाले विभाग में जमा करानी होगी। इसके बाद ही नगर निगम होटल व धर्मशाला संचालन का लाइसेंस देगा। नगर आयुक्त का यह आदेश पहले से जारी लाइसेंसधारियों पर भी लागू होगा। नगर निगम इस आदेश से पहले लगभग 55 होटल, धर्मशालाओं को बिना टैक्स जमा कराए ही लाइसेंस दे चुका था। अब उनसे टैक्स जमा कराने के लिए भागदौड़ की जा रही है। नगर निगम क्षेत्र में लगभग 526 होटल और लगभग 265 धर्मशालाएं पंजीकृत हैं। जबकि बड़ी संख्या में ऐसे भी होटल व धर्मशालाएं हैं जो बिना लाइसेंस के रसूखदारी के दम पर चल रही हैं। इन संपत्तियों से नगर निगम को प्रतिवर्ष पांच करोड़ रुपये से अधिक की आय होने का अनुमान है। धर्मशाला प्रबंधकों की सुविधा के लिए नगर निगम शिविर लगाने की भी तैयारी कर रहा है। कर एवं राजस्व अधीक्षक राहुल कैंथोला ने बताया कि नगर आयुक्त की सख्ती के बाद कुछ धर्मशाला प्रबंधकों ने टैक्स जमा कर दिया है, लेकिन ज्यादातर सीजन का बहाना बना रहे हैं।