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अंग्रेजी शासन काल से बस अड्डा, 1949 में नगर निगम से बनी लीज

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जोगेंद्र सिंह मावी
हरिद्वार।
हरिद्वार बस अड्डा स्थापना की सही तिथि का कोई दस्तावेज तो उपलब्ध नहीं है, लेकिन आजादी के बाद नगर निगम ने 1949 में बस अड्डे के लिए भूमि की लीज स्वीकृत की थी। बस अड्डे की 11 हजार 152 वर्ग मीटर भूमि है। अब इस भूमि को नगर निगम ने एचआरडीए को सौंपते हुए वाहन पार्किंग एवं कांपलेक्स बनाने को कार्ययोजना तैयारी कराई है। भूमि पर तैयार परियोजना की निर्माण लागत 195.25 करोड़ रुपये आंकी गई है।
शासन का कहना है कि भविष्य को देखते हुए बस अड्डे की भूमि कम होने से यहां जाम लगा रहता है। वहीं बस अड्डे को यथावत रखने वालों का तर्क है कि इसे शिफ्ट करने से शहर के व्यापार पर असर पड़ेगा।
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धर्मनगरी में महत्व को देखते हुए अंग्रेजों के शासनकाल में रेलवे स्टेशन के सामने ही बस स्टैंड बनाया गया। 15 अगस्त 1947 में देश की आजादी के बाद 1949 में नगर निगम ने बस स्टैंड की भूमि 11 हजार 152 मीटर को लीज दी। हरिद्वार निवासी 75 वर्षीय पूर्व विधायक अंबरीष कुमार की मानें तो उनके जन्म से पहले से बस अड्डा बना हुआ था। इस अड्डे से धर्मनगरी के चारों कोनों के साथ समस्त अखाड़े, आश्रम, मठ, मंदिरों में जाने का आसान रास्ता है। हरकी पैड़ी, मनसा देवी, मायादेवी मंदिर मात्र दो किमी की परिधि में हैं। दक्ष मंदिर, सतीघाट, चंडीदेवी के साथ समस्त अखाड़े आश्रम भी तीन से चार किमी की परिधि में ही आते हैं। यात्रियों के ठहरने के लिए आश्रम, होटल, धर्मशालाएं भारी तादाद में हैं। ऐसी प्राइम लोकेशन में बस स्टैंड स्थापित है कि अरबों रुपये खर्च करने के बावजूद भी दोबारा से स्थापित करना मुश्किल है।


अब यह बनाई गई नई कार्ययोजना
हरिद्वार में अंतरराज्यीय बस स्टैंड (आईएसबीटी) निर्माण की परियोजना डीपीआर हो चुकी है। इसके निर्माण पर 426.31 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। वर्तमान बस अड्डे को ट्रांसपोर्ट नगर ज्वालापुर में शिफ्ट किया जाना तथा वर्तमान बस अड्डे की भूमि पर 195.25 करोड़ रुपये की लागत से मल्टी स्टोरी वाहन पार्किंग के साथ व्यावसायिक कांपलेक्स बनाया जाएगा। अधिकारियों का तर्क है कि ट्रांसपोर्ट नगर में आईएसबीटी के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध है। इससे सूना पड़ा ट्रांसपोर्ट नगर भी आबाद हो जाएगा और शहर को एक नई सौगात भी मिल जाएगी। प्राधिकरण अधिकारियों का मानना है कि ट्रांसपोर्ट नगर आईएसबीटी के निर्माण से सिटी का विस्तार होगा और शहरवासियों को आर्थिक रूप से लाभ भी होगा।
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नए बस अड्डे की तैयार हो चुकी डीपीआर
एचआरडीए के पास ट्रांसपोर्ट नगर सराय ज्वालापुर में आईएसबीटी निर्माण के लिए पर्याप्त भूमि है। आईएसबीटी की डीपीआर वाप्कोस लिमिटेड ने तैयार की है, जिसमें उसने परियोजना की निर्माण लागत 426.31 करोड़ रुपये आंकी है। प्राधिकरण ने इस परियोजना को प्राथमिकता में शामिल किया है। कोशिश है कि महाकुंभ-2021 में शहर को आईएसबीटी की सौगात मिल जाएगी।
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