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--शांतिंकुज में धूमधाम से मनाया गया वसंतोत्सव

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हरिद्वार। उन्नति का संकल्प पर्व वसंतोत्सव शांतिकुंज में धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर जहंा शांतिकुंज मेें विभिन्न संस्कार संपन्न हुए वही दीप महायज्ञ में देश विदेश से आए हजारों साधक शामिल हुए। इस मौके पर शांतिकुंज की अधिष्ठात्री शैल दीदी ने कहा कि वसंत संत की तरह होता है। वह सूर्य की भांति सभी प्राणी में समान भाव से प्यार, उमंग, उत्साह उड़ेलता है। कहा कि विवेकानंद, मीरा, पं श्रीराम शर्मा आचार्य आदि के जीवन में जब वसंत आया तो उन्होंने वह कर दिखाए जिससे समाज युगों तक प्रेरणा व प्रकाश प्राप्त करता रहेगा।
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उन्होंने कहा कि जब वसंत स्थूल शरीर में उतरता है तो बल बढ़ता है। और सूक्ष्म शरीर में उतरता है तो वैचारिक क्षमता का विकास होता है। दंडी स्वामी, राजा विश्वरथ, एकलव्य की जीवन में उतरे वसंत ने उन्हें महान बना दिया। अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि युवावस्था की वासंती उमंग को लेकर कठिन से कठिनतम कार्य को भी सहज रूप से पूरा किया जा सकता है। इससे पूर्व मुख्य कार्यक्रम के दौरान शैलदीदी ने पर्व की पूजा अर्चना कर सर्वे भवन्तु सुखिन: की प्रार्थना की।
अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पंड्या ने कहा कि वसंत का दूसरा नाम युवा है। जीवन में जब युवावस्था आती है तब वसंत का उल्लास छा जाता है। आज से तीन दिन बाद महाराष्ट्र के नागपुर में देश भर से कई हजार युवा अपने वासंती उल्लास के साथ जीवन में नये परिवर्तन के लिए पहुँचेंगे। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के हर युवा समाज के नवनिर्माण में अग्रसर हों तो यह वसंत सार्थक होगा। कार्यक्रम के दौरान संस्था की अधिष्ठात्री शैलदीदी ने स्वाहिली तन्जानिया की प्रमुख भाषा, मराठी व पंजाबी भाषा की सात पुस्तकों का विमोचन किया। इस अवसर पर गायत्री परिवार के हजारों लोगों ने पूज्य आचार्य की समाधि पर पुष्प अर्पित कर उनके बताए सूत्रों को अपनाने का संकल्प लिया तो वहीं युवाओं ने समाज को विकसित करने में हर संभव सहयोग करने की शपथ ली। मंच संचालन प्रो. प्रमोद भटनागर ने किया। देश.विदेश से आये गायत्री साधकों ने पूज्य आचार्यश्री के पावन समाधि में श्रद्धांजलि अर्पित कर वसुधैव कुटुम्बकम् की प्रार्थना की। इस अवसर पर देश के अलावा अमेरिका, यूके, कनाडा, रूस, दक्षिण अफ्रीका, नेपाल समेत कई देशों से आए हजारों साधक उपस्थित थे।
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वसंत पर्व की पावन वेला में युगऋषि पं श्रीराम शर्मा आचार्य के प्रतिनिधि के रूप श्रद्धेया शैलदीदी ने शताधिक लोगों को गुरूदीक्षा दी, तो वहीं देश के विभिन्न राज्यों से आये बटुकों ने यज्ञोपवीत संस्कार कराए। छत्तीसगढ़, दिल्ली, उत्तराखंड सहित विभिन्न प्रांतों से आये 13 युवा दंपतियों ने आदर्श विवाह के बंधन में बंधे। नामकरण, मुंडन, विद्यारंभ सहित कई संस्कार बड़ी संख्या में सम्पन्न हुए। सायं दीप महायज्ञ में पूज्य आचार्यश्री के विचारों को जन.जन तक पहुंचाने के संकल्प लिया गया।
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