- अक्सर आबादी क्षेत्र में रहती थी मूवमेंट, हृदय रोग से था ग्रस्त
संवाद न्यूज एजेंसी
हरिद्वार। 55 वर्षीय एक नर हाथी की उपचार के दौरान मौत हो गई। वह हृदय रोग से ग्रस्त था और अक्सर आबादी वाले क्षेत्रों में देखा जाता था। पोस्टमार्टम के बाद हाथी को उसी स्थान पर दफना दिया गया।
डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध ने बताया कि शुक्रवार दोपहर को हाथी को ट्रैंकुलाइज किया गया था। यह कार्रवाई देवपुरा बीट के बिशनपुर कक्ष-02 में दक्ष मंदिर के सामने वाले जंगल में हुई। वन प्रभाग और विशेषज्ञों की टीमों ने मिलकर यह काम किया। डॉक्टरों की टीम जंगल में ही हाथी का उपचार कर रही थी। हालांकि, देर रात उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
हाथियों की निरंतर निगरानी में उसकी गतिविधियां मानव बस्तियों के निकट पाई गई थीं। वह नियमित रूप से आबादी वाले क्षेत्रों और कृषि भूमि में विचरण करता था। कभी-कभी वह शहर के अंदर भी आ जाता था।
भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों और पशु चिकित्सकों की संयुक्त टीम ने हाथी को विशेषज्ञों की देखरेख में ट्रैंकुलाइज किया। उसकी लगातार निगरानी की जा रही थी। अचानक स्थिति बिगड़ने पर उसे तत्काल ऑक्सीजन और आपातकालीन पशु चिकित्सा उपचार दिया गया। निर्धारित रिवर्सल औषधि भी उपलब्ध कराई गई। अथक प्रयासों के बावजूद हाथी की स्थिति में सुधार नहीं हुआ और उसने दम तोड़ दिया।
पोस्टमार्टम में हाथी की आयु लगभग 55 वर्ष आंकी गई है। उसकी बाहरी स्थिति सामान्य थी, लेकिन आंतरिक परीक्षण में हृदय की बीमारी पाई गई। इसमें मायोकार्डियल फाइब्रोसिस और कार्डियोमायोपैथी जैसे परिवर्तन मिले। इन्हीं कारणों से हाथी की मृत्यु हुई। डीएफओ ने बताया कि जंगली हाथियों का औसत जीवनकाल 50 से 60 वर्ष होता है, इसलिए 55 वर्ष अत्यधिक वृद्धावस्था की श्रेणी में आता है।
-
कुंभ मेला से पहले हाथी का निधन
जिस वृद्ध हाथी की मौत बीमारी से हुई है, उसका आबादी क्षेत्र में अधिक मूवमेंट था, इसलिए उसे कुंभ मेला के कारण रेडियो कॉलर किया जा सकता था। इससे उसकी लगातार निगरानी भी की जा रही थी, ताकि रेडियो कॉलर होने से हाथी की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकी। ऐसा कर वन विभाग कुंभ मेले में होने वाली किसी भी अप्रिय घटना को रोकना चाहता था लेकिन, हाथी कुंभ मेला शुरू होने से पहले ही अपना जीवन त्यागकर विदा हो गया।