हरिद्वार।
101 वर्ष पुरानी हरकी पैड़ी प्रबंधकारिणी संस्था की राजनीति इस समय बेहद गरमा गई है। आलम यह है कि अब तीर्थ पुरोहित ही गंगा सभा को गंगा नहर सभा कहने लगे हैं। कई स्थानों पर बैठकें हो रही हैं और वर्तमान पदाधिकारियों से सवाल पूछे जा रहे हैं। तीर्थ पुरोहित समाज गंगा को शासनादेश द्वारा नहर बताने और पदाधिकारियों की लगातार चुप्पी पर काफी खफा हैं।
हरिद्वार तीर्थ पर हजारों पुरोहितों प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था गंगा सभा के चार वर्ष बाद होने वाले चुनाव इस वर्ष होने वाले हैं। प्रत्येक चुनावी वर्ष में पुरोहितों की राजनीति हर बार गरमा जाती है और संस्था के तीन गुट बेहद सक्रिय हो जाते हैं। ताजा बवाल लगभग एक वर्ष से चल रहा है, जो अब चुनावी वर्ष में गर्म हो चला है। इस हवा मारवाडी और पंडा गुट से मिली जो इस संबंध में मुख्यमंत्री से मिल आया। नई सरगर्मी का कारण यह है कि गंगा सभा के पूर्व अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी और पूर्व महामंत्री वीरेंद्र श्रीकुंज, मारवाडी खेमे के साथ शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक को मुख्यमंत्री से मिलने गए। अब अगर मुख्यमंत्री ने गंगा को नहर बताने से संबंधित हरीश रावत सरकार द्वारा जारी शासनादेश निरस्त न किया तो मारवाडी खेमा हाईकोर्ट जाने को पूरी तरह तैयार है।
सरकार ने शासनादेश निरस्त न किया गया तो पुरोहित समाज इसी को मुद्दा बनाएगा और वर्तमान अध्यक्ष पुरुषोत्तम शर्मा गांधीवादी व महामंत्री रामकुमार मिश्रा को हटाने की मुहिम त्रिपाठी खेमे के साथ मिलकर शुरू कर देगा। इस संबंध में पुरोहित पंडित सुरेंद्र मारवाडी का कहना है कि वर्तमान पदाधिकारियों से कई बार आग्रह किया गया कि वे मुख्यमंत्री से मिलकर शासनादेश को निरस्त कराएं, लेकिन गांधीवादी व मिश्रा खेमे ने मात्र एक चिट्ठी भेजकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली। यह उन दर्जनों राजाओं और महामना मदनमोहन मालवीय का सीधा अपमान है, जिन्होंने ब्रिटिश सत्ता से लंबा सघ्ंार्ष कर गंगा पर बांध नहीं बनने दिया। अब भूमाफिया के दबाव में वर्तमान पदाधिकारी हरकी पैड़ी से होकर बहने वाली गंगा को नहर मानने के लिए तैयार हैं ताकि इसके किनारे दो मीटर निर्माण प्रतिबंध कानून का लाभ लेकर अवैध निर्माण शुुरू कराए जा सकें।
सभा के बजट सत्र में काफी हंगामे के पूरे आसार हैं। सभा के महामंत्री रामकुमार मिश्रा के अनुसार हम केवल पत्र भेज सकते थे और इससे अधिक हमें कुछ नहीं करना है। पत्र पहले ही भेजा जा चुका है।