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संविदा कर्मचारियों पर अटकी आउटसोर्स की तलवार

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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
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नगर निगम में कार्यरत 178 संविदा कर्मचारियों का भविष्य अधर में लटका है। करीब डेढ़ दशक से काम कर रहे इन कर्मचारियों को लेकर अधिकारियों के साथ जनप्रतिनिधि भी गंभीर नहीं हैं। वर्तमान में इनको संविदा या आउटसोर्स पर रखने की बोर्ड की स्वीकृति भी नहीं है, इसके बाद भी अधिकारी उनसे काम ले रहे हैं।
142 सफाई कर्मचारी, पथ प्रकाश और विभिन्न पटलों के अधीन 36 अन्य कर्मचारी भी संविदा पर हैं। नगर निगम का नया ढांचा 2015 में बना था, जिसमें सफाई कर्मचारियों और पथ प्रकाश व चतुर्थ श्रेणी के पदों पर संविदा नियुक्ति समाप्त कर आउटसोर्स किया गया है। अप्रैल 2018 से शासनादेश लागू है लेकिन नगर निगम में जो पौने दो सौ संविदा कर्मचारी हैं वह नगर निगम का ढांचा बनने से पहले से चले आ रहे हैं। इसके बावजूद लेखाधिकारी रत्नेश कुमार ने इस शासनादेश को पहले से चले आ रहे संविदा कर्मचारियों की फाइल में लगा दिया है। जिससे इन कर्मचारियों का भविष्य अधर में अटक गया है। अधिकारी इनसे बोर्ड की स्वीकृति के बिना भी काम तो ले रहे हैं।
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सूत्रों के अनुसार नगर निगम का ढांचा बनने से पहले शासन ने नगर निगम में कार्यरत संविदा कर्मचारियों की सूची मांगी थी। तत्कालीन नगर आयुुक्त विप्रा त्रिवेदी ने इन कर्मचारियों को संविदा पर चले आ रहे बताने के बजाए आउटसोर्स की सूची में उनका नाम भेजा था। इसलिए शासन उनको आउटसोर्स ही मानता है।
पथ प्रकाश कर्मियों में रोष
पथ प्रकाश विभाग में कार्यरत प्रमोद, नरेंद्र, मनोज, सुभाष, हरीश, भूषण, ईश्वर शर्मा, राजेश, नवीन आदि का कहना है कि वह 15 से 20 साल पुराने हैं और वह नियमितीकरण की उम्मीद लगाए हुए थे। इसके बजाए उन्हें आउटसोर्स दिखाने का षड्यंत्र किया जा रहा है। लेखाधिकारी रत्नेश कुमार का कहना है कि शासनादेश आया है तो उसको वह कैसे छुपा सकते हैं।
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शासन ने संविदा नियुक्तियों पर रोक लगा दी है। पहले से चले आ रहे संविदा कर्मचारियों के संबंध में शासन से दिशा-निर्देश लिया जाएगा। शासन ही इस संबंध में उचित निर्णय ले सकता है।
- आलोक कुमार पांडेय नगर आयुक्त
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