अरविंद सिंह
हरिद्वार।
उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क और जिम कार्बेट नेशनल पार्क सहित देश के अन्य वन्य जीव पार्कों में वन्य जीवों और इंसानों के बीच बढ़ते संघर्ष ने केंद्र सरकार की पेशानी पर बल डाल दिए हैं। यही वजह है कि केंद्र सरकार इसे रोकने के लिए स्थायी समाधान ढूंढना चाहती है। इसे लेकर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने उत्तराखंड, यूपी, मध्य प्रदेश, ओड़ीसा समेत देश के अन्य नेशनल पार्कों के निदेशकों और अफसरों की दिल्ली में बैठक बुलाई है।
वाइल्ड लाइफ कंर्वेशन सोसायटी की रिपोर्ट के मुताबिक 2001 से लेकर 2010 के बीच उत्तराखंड में जंगली जीवों और इंसानों के बीच संघर्ष की 550 घटनाएं हुई। एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक उत्तराखंड में वर्ष 2000 से 2015 के बीच लेपर्ड के हमले से 235 लोगों को जान गंवानी पड़ी, जबकि 375 लोग घायल हुए। वहंीं हाथियों के हमलों में 68 लोगों की जान गई और 65 लोग घायल हुए। खतरनाक जीवों में शामिल चीते ने इन दोनों के मुकाबले कम लोगों पर हमला किया है। आंकड़ों के मुताबिक चीतों के हमलों से 16 लोगों की जान गई, जबकि 23 लोग घायल हुए। इसके साथ ही राज्य के पर्वतीय इलाकों में भालू भी 18 लोगों की जान ले चुका है जबकि 388 लोग घायल हुए। वन्य जीव और इंसानों के बीच हुए संघर्ष के ये वो आंकड़े हैं जो दस्तावेजों में दर्ज है। इसके अलावा कुछ मौतें ऐसी भी हैं जिसकी जानकारी विभागीय अफसरों तक नही पहुंच पायी। यह आंकड़ा तो महज उत्तराखंड का है। वन्य जीवों और इंसानों के बीच बढ़ते संघर्ष से चिंतित सरकार अब इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने की योजना बना रही है। जिसके लिए देश के वन्य जीव पार्कों के अफसरों केा दिल्ली बुलाया गया है।
राजाजी नेशनल पार्क के निदेशक सनातन सोनकर ने बताया कि इस संबंध में दिल्ली में बुलाई गई बैठक में वन्य जीवों के हमलों को रोकने के ेलिए कारगर कदम उठाने पर चर्चा की जाएगी। पार्क निदेशक सनातन भी मानते हैं कि वन्य जीवों और इंसानों के बीच संघर्ष की घटनाएं बढ़ी हैं। बकौल निदेशक सनातन संघर्ष की घटनाओं का सबसे बड़ा कारण इंसानों का वन्य जीवों के क्षेत्र में बढ़ता हस्तक्षेप है। पार्कों के आसपास जिस तरीके से मानवीय गतिविधियां बढ़ी हैं उससे संघर्ष की घटनाएं बढना लाजिमी है।
उल्लेखनीय है कि राजाजी नेशनल पार्क पिछले दिनों उस समय सुर्खियों में आ गया था जब एक हाथी ने दो लोगों को सड़क पर पटककर मार डाला था। इसके अलावा पूरे साल भर वन्य जीवों और इंसानों के बीच संघर्ष की घटनाएं होती रहती हैं।