हर्ष सैनी
धनौरी। अंग्रेजों के शासन में बने धनौरी के समीप 173 साल पहले बना गंगनहर का पुल आज भी यातायात का बोझ ढो रहा है। हालांकि बूढ़ा हो चुका यह पुल अब ट्रैफिक का दबाव झेलने की स्थिति में नहीं है। प्रशासन इस पर पुल से ट्रैफिक नहीं चलाने के कई बार बोर्ड लगा चुका है, लेकिन विकल्प नहीं होने सेइसी पुल से यातायात गुजर रहा है।
हरिद्वार- भगवानपुर मार्ग को जोड़ने वाला यह एकमात्र पुल है। पुरानी गंगनहर बनने के साथ ही यह पुल भी 1845 में बनरा। तब इसका डिजायन एक सौ वर्ष के लिए बनाया गया था। अब इसकी उम्र 173 साल हो गई है। इसके बाद भी इस पुल पर लगातार ट्रैफिक दौड़ रहा है। 2010 कुंभ मे हरिद्वार से पंजाब को जोड़ने के लिए बाया धनौरी बने नए मार्ग से पुल पर यातायात का दबाव पहले से और अधिक बढ़ गया है। राज्य बनने के 17 साल बाद भी सरकारें इस पुल का विकल्प तैयार नहीं कर पाई।
वर्ष 2010 कुंभ के दौरान हरिद्वार- भगवानपुर मार्ग पर रतमऊ नदी पर बने नए पुल के साथ ही पुरानी गंगनहर पर भी पुल बनाने के लिए सर्वे किया गया था। तब ग्रामीणों को उम्मीद जगी थी कि यहां भी ज्वालापुर और हरिद्वार में पुराने पुलों के समानांतर नए पुल बनेगा। सर्वे रिपोर्ट शासन से नामंजूर होने से यह योजना परवान नहीं चढ़ सकी। ग्रामीण नकलीराम सैनी, मुल्कीराज, सुभाष सैनी, मांगेराम ने बताया कि पुल की हालत बदहाल है। सिंचाई विभाग पुल के रखरखाव के लिए गंभीर नही है। उनका कहना है कि 173 साल पुराने पुल के स्थान पर नए पुल बनाने की कवायद शुरू होनी चाहिए।
वहीं लोक निर्माण विभाग रुड़की के सहायक अभियंता नवीन कौशिक ने बताया कि पिछले कुंभ में पुल का सर्वे कर इस्टीमेट बनाकर शासन को भेजजा गया था। आने वाले कुंभ के निर्माण कार्यों में यहां भी पुल का निर्माण प्रस्तावित है। शासन से मंजूरी मिलने के बाद ही इस पर काम शुरू हो होगा।