अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
श्रीमद्भागवत कथा भगवान की दिव्य वाणी है। इसका श्रवण करने से व्यक्ति को सांसारिक और व्यावहारिक ज्ञान की प्राप्ति होती है और वह सत्य के मार्ग पर अग्रसर होकर मोक्ष की प्राप्ति करता है। यह बात महंत स्वामी रूपेंद्र प्रकाश महाराज ने प्राचीन अवधूत मंडल आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कही।
उन्होंने कहा कि भागवत कथा श्रवण से व्यक्ति के मन का शुद्धिकरण होने के साथ ही उसमें चरित्र का निर्माण होता है। यह भक्त और भगवान की वह संयुक्त कथा है जिसके श्रवण से भक्त जिस रूप में चाहता है भगवान उसी रूप में उसे दर्शन देकर उसे आशीर्वाद देते हैं। कहा कि भागवत कथा में भगवान श्रीकृष्ण सभी देवों के रूप में रस भाव की भक्ति का निरूपण भक्तों को कराते हैं। इसलिए भगवान की विभिन्न कथाओं का सार मोक्ष दायिनी श्रीमद्भागवत है।
कथा व्यास स्वामी उमाशंकर देव महाराज ने कहा कि कलियुग में भागवत ही भवसागर से जीवन को पार लगाने का माध्यम है। जिसके सुनने से सहस्त्र गुणा पुण्य फल की प्राप्ति होती है। इसलिए मन की शांति व भौतिक कष्टों के निवारण के लिए भागवत कथा का श्रवण जरूर करना चाहिए। इस मौके पर कथा के संयोजक कुलदीप गुप्ता व यजमान गुरुमुख सिंह नामधारी, रणदीप सिंह पुंडीर, हरजीत कौर, कामनी सडाना, आशा वालिया, राखी चड्ढा, पीके बंसल, गंगाशरण मददगार, विजयपाल, राजेश शर्मा, अशोक अग्रवाल, अरुणा बंसल, विपुल शर्मा, शशी उपाध्याय, आरडी अग्रवाल, रमेश उपाध्याय, सत्यवान सत्यम, विपुल, कपिल, विक्रम, प्रदीप मेहता, विरेंद्र सक्सेना, संदीप वेदालंकार, सोमप्रकाश शर्मा, पूर्णा शर्मा, महेंद्र अग्रवाल, मधु जैन आदि उपस्थित थे।