हरिद्वार। वसंत पंचमी का त्योहार पतंजलि योगपीठ में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ पतंजलि योगपीठ परिसर में स्थित विशाल यज्ञशाला में यज्ञ के साथ किया गया। इस अवसर पर पतंजलि परिसर आयुर्वेद को प्रदर्शित करती हुई रंगोलियों से सजाया गया। आयुर्वेद के साथ गहराई से जुड़े इस त्यौहार पर पतंजलि आयुर्वेद महाविद्यालय, पतंजलि विश्वविद्यालय, वैदिक गुरुकुलम तथा वैदिक कन्या गुरुकुलम के छात्रा-छात्राओं में विशेष उत्साह व उमंग की लहर दिखाई दी।
इस अवसर पर आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि वसंत पंचमी का यह अवसर आयुर्वेद और प्रकृति का सबसे करीबी त्यौहार है। यह उत्सव सम्पूर्ण प्रकृति को नये उत्साह से भर देता है। पेड़-पौधें व वनौषधियों पर नई कोंपलें आना शुरू होती है। इसी प्रकार हमारे जीवन में भी नये उत्साह एवं उमंग का संचार होता है।
आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि मनुष्य प्रकृति के अधीन हैं। अत: जितना उसके साथ रहेगा उतना ही स्वस्थ व खुशहाल रहेगा। जो प्रकृति के विपरीत चलेगा वह नष्ट हो जायेगा। आज का दिन प्रकृति के साथ रहने का अवसर है। माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि में मनाया जाने वाला बसंत पंचमी का यह पर्व मां सरस्वती की उपासना का पर्व भी है। आज हम अंधकार से निकलकर प्रकाश की ओर प्रेरित हो। उन्होंने कहा कि विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा यज्ञ के द्वारा करना हमारी लाखों-करोड़ों वर्ष पुरानी परंपरा हैं। इसी क्रम में राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयं सेवकों के द्वारा पतंजलि विश्वविद्यालय के प्रांगण में बसंत के इस शुभ उत्सव पर कुलपति डॉ. कुलवंत जी के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अध्किारी डॉ. वैशाली गौड़, कपिल शास्त्री आदि ने माँ सरस्वती की पूजा अर्चना की तथा स्वयं सेवकों ने सरस्वती वंदना, भजन, कीर्तन एवं पतंग उड़ाकर इस पर्व को मनाया।