करीब चौदह महीने तक जिला समाज कल्याण विभाग अधिकारी की कुर्सी पर काबिज रहे मौजूदा संयुक्त निदेशक गीताराम नौटियाल ने अपने कार्यकाल में 16 करोड़ से अधिक की धनराशि निजी शिक्षण संस्थानों को आवंटित कर दी थी, हालांकि एसआईटी के सामने घोटाले के एवज में उन्हें मिली रकम के संबंध में जानकारी जुटाने की चुनौती बरकरार है। एसआईटी के अधिकारियों की माने तो नौटियाल ने कहां कहां निवेश किया हुआ है, यह जानना उनका मुख्य मकसद है।
करीब पांच महीने से एसआईटी के साथ आंख मिचौनी खेल रहे संयुक्त निदेशक गीताराम नौटियाल ने गिरफ्तारी से बचने की हर संभव कोशिश की, लेकिन नाकामयाबी ही हाथ आई। आखिरकार सुप्रीम कोर्ट से भी उन्हें मायूसी हाथ लगी। इन बीते पांच महीनों में आरोपी अधिकारी ने एसआईटी को पूरी तरह से छकाकर रखा। उत्तराखंड में तो एसआईटी उसकी खोजबीन में दर दर भटकती रही, लेकिन वह हत्थे नहीं चढ़े। एसआईटी के सूत्रों की माने तो घोटाले की पटकथा नौटियाल ने अपने 14 महीने के कार्यकाल में लिखी थी और 16 करोड़ की रकम धड़ाधड़ बांटी गई थी। इस मामले का एसआईटी की जांच में खुलासा हुआ है, लेकिन एसआईटी इस बात की तह तक जाना चाहती है कि घोटाले से मिली रकम को कहां निवेश किया गया है ताकि उस रकम से खरीदी गई संपत्ति को सीज किया जा सकें। विवेचनाधिकारी एएसपी आयुष अग्रवाल की माने तो इस प्वाइंट पर उनका मुख्य फोकस है, इसके लिए नौटियाल से लगातार पूछताछ की जा रही है।
नौटियाल की संपत्तियों की होती रही चर्चा
नौटियाल की संपत्तियों को लेकर चर्चा होती रही है। उत्तराखंड के अलावा कई अन्य प्रदेशों में भी उसकी संपत्तियों की बात उठती रही है, लेकिन पुष्टि नहीं हो सकी है। कई बैंक खातों में भी उनका पैसा जमा होना सामने आया है।
अब तक 13 की गिरफ्तारी
छात्रवृत्ति घोटाले में अब तक 12 शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े 13 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। एसआईटी अब अलग अलग शिक्षण संस्थान के खिलाफ जिले भर के थाने और कोतवाली में केस दर्ज करवा रही है।