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अधिकारी किसी को उपकृत करने की ठान लें तो रास्ता निकाल ही लेते हैं .......

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हरिद्वार। सिंचाई कार्य मंडल हरिद्वार की टेंडर कमेटी ने ई-टेंडरिंग की शर्तों को बदलकर उत्तर प्रदेश के दो भाइयों के बीच ही बोली लगवाकर आठ करोड़ रुपये में तीन साल के लिए पंतद्वीप पार्किंग ठेका दे दिया था। सूचना अधिकार अधिनियम के तहत मांगी जानकारी में इसका खुलासा हुआ है। एक भाई ने दूसरे भाई को अपनी फर्म का प्रमाणपत्र सबलेट कर नीलामी में भाग लेने की शर्त पूरी की है। नियमानुसार काम और अनुभव प्रमाणपत्र सबलेट (शिक्मी) नहीं हो सकता है। इससे साफ होता है कि अधीक्षण अभियंता की अध्यक्षता वाली टेंडर कमेटी ने प्रमाणपत्रों की जांच तक नहीं की।
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सिंचाई कार्य मंडल हरिद्वार ने तीन साल के लिए सात मार्च को पंतद्वीप पार्किंग के लिए ई-टेंडर आमंत्रित किए थे। अमरोहा उत्तर प्रदेश के दो भाईयों ने ही ई-टेंडरिंग के लिए आवेदन किया। इसके लिए ठेकेदार की पात्रता शर्त डबल ए रखी गई थी। लेकिन सात मार्च को शर्त बदल दी गई और शासन की अनुमति के बिना ही दो भाइयों से ही बोली लगावकर आठ करोड़ का ठेका दे दिया गया। विभाग ने आठ मार्च को पंतद्वीप पार्किंग का कब्जा भी चहेते दे दिया था। सफल बोलीदाता ने शर्त पूरा करने के लिए 2 करोड़ 60 लाख रुपये का ठेका लेने व काम करने का अनुभव का प्रमाणपत्र भी उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग का लगाया है जबकि उत्तराखंड सिंचाई विभाग में काम करने का प्रमाणपत्र लगाया जाना था।
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मुख्य अभियंता ने वित्तीय अधिकार भी दिया
शासन की ठेका नियमावली में सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता को दो करोड़ रुपये तक के ठेके की नीलामी अधिकार है। इससे अधिक का ठेका मुख्य अभियंता के स्तर से ही दिया जा सकता है। लेकिन पार्किंग का ठेका नीलम करने के लिए मुख्य अभियंता स्तर द्वितीय ने अपने वित्तीय अधिकार अपने अधीनस्थ अधीक्षण अभियंता के हवाले कर दिया था। शासनादेश में वित्तीय अधिकार हस्तांतरित करने का कोई प्रावधान नहीं है। टेंडर कमेटी के अध्यक्ष अधीक्षण अभियंता आरके तिवारी का कहना है चूंकि प्रकरण हाईकोर्ट में विचाराधीन है इसलिए विचाराधीन मामले में उन्हें कुछ नहीं कहना है। कमेटी ने राजस्व हित में निर्णय लिया है।
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