हरिद्वार। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में राजाजी टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने करीब 42 साल बाद जमीन पर कब्जा ले लिया। पार्क की यह भूमि दस साल के लिए लीज पर ली गई थी, लेकिन लीज समाप्त हो जाने के बाद भी उस पर कब्जा चला आ रहा था। दोपहर बाद तक चली कब्जा हटाने और लेने की इस प्रक्रिया के दौरान पार्क के साथ ही पुलिस के भी अधिकारी मौजूद रहे।
पार्क के अधिकारियों के अनुसार आध्यात्मिक संस्था दूधाधारी बर्फानी आश्रम की ओर से सन 1976 में
राजाजी टाइगर रिजर्व की चार एकड़ जमीन को दस साल के लिए लीज पर लिया था। यह अवधि समाप्त हो जाने के बाद भी कब्जा बना हुआ था। आश्रम के संचालकों की ओर से लीज का विस्तारीकरण और नवीनीकरण नहीं कराया गया। जिस पर पार्क की ओर से इसे अतिक्रमण मानते हुए हटाने की कवायद तेज की गई। दोनों पक्षों की ओर से जमीन को अपने अधिकार में रखने के लिए लंबी लड़ाई लड़ी गई। स्थानीय स्तर से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक भी लड़ाई जारी रही। बताया गया कि इस जमीन के बदले में आश्रम की ओर से पार्क को बुग्गावाला क्षेत्र में इतनी ही जमीन देने का भी प्रस्ताव दिया गया था लेकिन पार्क प्रशासन की ओर से उसे खारिज कर दिया गया। आश्रम के कब्जे वाली जमीन की कीमत दी जाने वाली प्रस्तावित जमीन की कीमत से काफी कम थी। इस संबंध में चल रहे मुकदमे में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश पर आश्रम प्रशासन को 31 मई तक जमीन खाली करने का समय दिया गया था जिस पर आश्रम प्रशासन ने पहले ही
अपने पक्के निर्माण हटा लिए थे। शनिवार की सुबह वन्य जीव प्रतिपालक कोमल सिंह के नेतृत्व में टीम जमीन पर कब्जा लेने के लिए पहुंची।