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..विश्व विद्यालयों से क्रॉस चेक पर खुल रही छात्रवृति घोटाले की परतें

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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
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करोड़ों के छात्रवृत्ति घोटाले की परतें उन विश्वविद्यालयों के रिकार्डों की जांच करने पर खुल रही है, जहां से निजी शैक्षणिक संस्थानों ने मान्यता ली हुई है। विश्वविद्यालय के रिकार्ड और निजी शैक्षणिक संस्थान के रिकार्ड में छात्रों की संख्या में काफी अंतर है। इससे सीधे सीधे फर्जी छात्रों की संख्या निकलकर आ रही है।
एसआईटी ने जिस आईपीएस कालेज के एमडी अंकुर शर्मा को गिरफ्तार किया, उसके कालेज में इस तरह की ही हेराफेरी निकलकर सामने आई है। हैरानी की बात ये है कि अनुसूचित जनजाति के चार सौ से अधिक छात्र कालेज के रिकार्ड में दर्शाए गए है, जबकि वे उस विश्वविद्यालय के रिकार्ड में नहीं है, जहां से शैक्षणिक संस्थान ने उस पाठ्यक्रम की मान्यता ली हुई है, जिसमें छात्र का दाखिला दिखाया गया है।
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ये सभी छात्र देहरादून के जौनसार बावर क्षेत्र और ऊधमसिंह नगर के सितारगंज, खटीमा क्षेत्र के हैं। माना जा रहा है कि पूरे सिंडीकेट के तहत इन छात्रों को घर बैठे डिप्लोमा मिलने का लालच देकर यहां बुलाया गया और फिर उनके शैक्षणिक प्रमाणपत्र लेकर बैंक में खाते खुलवा दिए गए। एसआईटी उन सभी विश्चवविद्यालयों से रिकार्ड एकत्र कर रही है, जहां जहां से कालेजों ने अपने यहां संचालित हो रहे पाठ्यक्रमों की मान्यता ली हुई है। एसआईटी की कार्रवाई केवल कालेज के स्वामी, प्रबंधक तक ही सीमित नहीं रहेगी बल्कि कर्मचारियों पर भी शिकंजा कसा जाना तय है।
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2014-15 सत्र में बेतहाशा बढ़ गई छात्रों की संख्या
हरिद्वार। छात्रवृत्ति के धन हड़पने के लिए छात्रों की संख्या शिक्षण सत्र 2014-15 में बेतहाशा बढ़ गई, जबकि उससे पहले साल में आधे से भी कम छात्रों की संख्या थी। यही नहीं अगले साल फिर से छात्रों की संख्या आधे से कुछ अधिक रह गई। साफ है कि सत्र 2014-15 में जहां अनुसूचित जाति के छात्रों की संख्या 15688 थी तो उससे पहले साल 6435 थी। जबकि अगले सत्र 2015-16 में 9965 ही रह गई। पिछड़ी जाति के छात्र सत्र 2014-15 में 6077 थी, उससे पहले सत्र में मात्र 2197 थी। अगले सत्र 2015-16 में 3226 रह गई। यही नहीं उससे अगले सत्र 2016-17 में 775 ही छात्र रह गए। यह जानकारी समाज कल्याण विभाग ने सूचना के अधिकार के तहत खन्नानगर निवासी सचिन चौधरी को दी थी।
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