हरिद्वार।
उत्तरी हरिद्वार में गंगा के कई घाट गंगाजल के लिए तरस रहे हैं। कारण यह है कि गंगा में पत्थर और रेत आदि जमा हो जाने के कारण गंगा की धारा का रुख बदला गया है। करोड़ों रुपये खर्च करके बनाए गए गंगा घाटों तक गंगा जल नहीं पहुंच पा रहा है। जिलाधिकारी दीपक रावत ने इस समस्या का निराकरण कराने के लिए अपर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है।
उत्तरी हरिद्वार में गंगा में जमा हुई सामग्री के कारण गंगा की धारा बदली हुई है। इस कारण सप्तसरोवर क्षेत्र के कई घाटों पर गंगा का जल नहीं पहुंच पा रहा है। वर्ष 2016 में हुए अर्द्धकुंभ के दौरान संतों ने कई दिन तक आंदोलन कर इस बारे में सरकार से प्रभावी कदम उठाने की मांग की थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत के निर्देश पर गंगा के बीच में ही नाला बनाकर पानी को घाटों तक पहुंचाया गया था, लेकिन कुछ दिन बाद स्थिति एक बार फिर वैसी ही हो गई है। भूमा निकेतन, चित्रकूट घाट, अग्रसेन घाट, बृज निवास धाम आदि घाटों पर समुचित पानी नहीं आने के कारण यहा श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खड़खड़ी स्थित श्मशान घाट पर भी गंगा की धारा घाट से दूर होकर बह रही है। जिलाधिकारी ने बताया कि यह समिति इन घाटों पर प्रशासन की गंगाजल कैसे पहुंचे और यहां जमा सिल्ट का आंकलन करने के साथ ही इसे हटवाने के बारे में भी अपनी रिपोर्ट यह समिति देगी। जिलाधिकारी ने बताया कि एक सप्ताह के भीतर समिति को अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया है।