अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
हरिद्वार-रुड़की विकास प्रधिकरण के उपाध्यक्ष नितिन भदौरिया ने कहा कि शोध के माध्यम से ही अपने प्राचीन ग्रंथों में निहित ज्ञान-विज्ञान को जान सकते हैं। आज आधुनिकता के इस युग में शोध की महत्ता लगातार बढ़ रही है। छात्र-छात्राओं को श्रेष्ठ शोध के लिए प्रेरित करने की जरूरत है।
निरामया योगम रिसर्च फाउंडेशन एवं कोर कालेज रुड़की की ओर से आयोजित पांच दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के समापन समारोह में मुख्य अतिथि नगर निगम के आयुक्त नितिन भदौरिया ने कहा कि युवाओं को विज्ञान के साथ-साथ साहित्यिक शोध पर रचनात्मक कार्य के लिए आगे आना चाहिए। उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के ऋषिकुल आयुवर्दिक परिसर के निदेशक प्रो. सुनील कुमार जोशी ने कहा कि शोध के कारण ही आज विश्व में योग एवं मर्म चिकित्सा को अपनाया जा रहा है। विभिन्न रोगों के निवारण के लिए इस पर शोध किए जा रहे हैं। देव संस्कृति विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डा. संदीप ने कहा कि वैज्ञानिक शोध से ही आध्यात्म के रहस्यों को समझा जा सकता है। उत्तराखंड संस्कृत विवि के वित्त अधिकारी डा. तंजीम अली ने कहा कि ऐसी कार्यशालाओं के आयोजन से प्रतिभागियों को श्रेष्ठ शोध करने में मदद मिलेगी। कार्यक्रम के आयोजन सचिव योगाचार्य डा. उमिला पांडेय ने कहा कि निरमाया योगम फाउंडेशन कि यह जिम्मेदारी है कि वह शोधार्थियों एवं छात्रों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए उनका मार्गदर्शन करे। इस अवसर पर कोर कालेज के अध्यक्ष जेसी जैन, डा. नरेश चौधरी ने कार्यशाला में सहयोग किया। इस अवसर पर संयोजक डा. राकेश उपाध्याय, सहसंयोजक वीरा लक्षमी, डा. अमर, डा. रविंद्र, डा. संजय, डा. अग्रवाल, डा. त्यागी, डा. अजय शर्मा आदि मौजूद थे।