हरिद्वार। शहर के अंदर से गंगा में पहुंच रहे बरसाती नालों में जिन लोगों और व्यवसायियों ने अपने होटल, रेस्टोरेंट, टॉयलेट के पानी का पाइप निकाल रखे हैं, उनकी अब खैर नहीं है। हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी को नोडल अधिकारी नामित किया है।
जिलाधिकारी बरसाती नालों में गंदगी बहाकर गंगा को प्रदूषित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। ऐसे सभी व्यवसायियों को अपने पाइप नाले से हटाने होंगे। हाईकोर्ट ने आदेश में कहा कि बरसाती नालों में केवल बरसात का ही पानी जाना चाहिए। इसके अलावा किसी भी प्रकार का पानी जाता है तो जिलाधिकारी जिम्मेदार होंगे। हाईकोर्ट ने यह आदेश कोर्ट कमिश्नर निखिल सिंघल और चेतन जोशी की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट पर दिया है। कोर्ट कमिश्नर द्वय ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि निरीक्षण के दौरान नाईसोता नाला, चोटीवाला नाला, तीरथ होटल नाला, कुशावर्तघाट के बरसाती नालों से गंगा घाट में लोगों द्वारा गंदा पानी छोड़ा जा रहा है। बताया कि होटल, रेस्टोरेंट, वालों अपने बाथरूम, रसोई के पाइप नालों में निकाल रखें हैं, जिस कारण गंदा पानी गंगा में निरंतर बहता रहता है। समाजसेवी रमेशचंद्र शर्मा ने इन नालों को उन्हें दिखाया था। कोर्ट कमिश्नर ने तभी अधिकारियों से कहा था कि जब बरसात नहीं हो रही है तो फिर नाले में पानी कहां से आ रहा है। कोर्ट कमिश्नरों को गंगा को प्रदूषित नालों को दिखाने के कारण ही अधिकारियों ने पुलिस को उन्हें हटाने का निर्देश दिया था, लेकिन तब तक वह अपना काम कर चुके थे। जिसकी झलक हाईकोर्ट के पारित आदेश में भी मिलती है। शर्मा ने बताया कि हाईकोर्ट का आदेश इंटरनेट पर डाल दिया गया है। छह पृष्ठ के आदेश के कई और महत्वपूर्ण आदेश भी दिए गए हैं।
मल-मूत्र भी डालते हैं नालों में
हर की पैड़ी क्षेत्र के नाईसोता नाला व तीरथ होटल के नीचे अपर रोड से आ रहे बेलदेई के नाले में तो लोगों ने टॉयलेट के पाइप भी निकाल रखे हैं। नगर निगम की ओर से नाला सफाई के दौरान ही इसका पता चल गया था। जब सफाई कर्मचारी नाला साफ कर रहा था, उसी वक्त टॉयलेट के पाइप से गंदगी छोड़ी गई। इसके बाद सफाईकर्मियों ने काम करने से इंकार भी कर दिया था। लेकिन अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। अब जवाबदेही तय होने से खलबली है। नगर आयुक्त का भी कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश का पालन कराया जाएगा।